रविवार, 3 मार्च 2024

PM Kisan सम्मान निधि पाने के बैंको का चक्कर लगा थक गए किसान, कब होगा समस्या का समाधान?

किसानों के लिए बस रह गया है लाइन लगाकर खड़ा रहना चाहे वो नोटबन्दी के लाइन हो या फिर सम्मान निधि आने पर चाहे वो खेती का पैसा हो या फिर सम्मान निधि का बैंको पर लाइन लगानी पड़ती है इसके बाद मे सम्मान निधी के फॉर्म भरवाने के लिए लाइन लगाना हो सब कामों मे किसान को ही लाइन लगानी है पुराने समय से अब तक सब लोगों की बात को सुना जाता है सिर्फ किसानों की समस्या को कोई भी नहीं सुनता है 


प्रधानमंत्री सम्मान निधी पाने के लिए कृषि कार्यलयों मे अभी भी किसान लाइन लगा कर खड़े है वो अपना काम छोड़ कर पैसे निकालने के लिए सुबह से शाम तक लाइन मे खड़े है और परेशान हो रहे है किसी का आधार गलत है और किसी का फॉर्म भरा नहीं गया और किसी की बैंक की kyc नहीं हुई है और किसान इस समस्या का हल नहीl निकाल पा रहे है 

प्रधानमंत्री ने किसानों को सम्मान निधि की 16 वी किस्त किसानों के खातों मे डाल दी है लेकिन इसके साथ ही एक नई समस्या ने जन्म ले लिया है पैसे तो प्रधानमंत्री ने डाल दिए है लेकिन किसी के पास मैसेज नहीं आया है और किसी के खाते मे अभी तक पैसे नहीं आए है जिनके पैसे नहीं आए है उन किसानों की लाइन निर्देश कार्यलय पर लगी है लेकिन लोगों के समस्या और किस्त ना आने की जानकारी आधिकारियों के पास पहुँच रही है लेकिन इसका कोई भी समाधान हो रहा है लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रहे है शुक्रवार को उप कृषि निदेशक रोहतश कुमार ने बताया जिले मे कुल 2.30 किसान पी ए म किसान सम्मान निधी योजना मे पंजीकृत है अभी 16 वी किस्त किसानों के खाते मे आई है इसके वारे मे विभाग को कोई जानकारी नहीं है जिन किसानों के मोबाईल पर मैसेज नहीं आया है ऐसे किसान हेल्प डेस्क पर आकार जानकारी ले रहे है और बताया मोबाईल पर मैसेज बहुत दिनों का आएगा इससे ये सवाल उठ रहा है प्रधानमंत्री योजना का कुछ किसानों को इसका लाभ मिल रहा है और कुछ को नहीं

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गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

पीएम मोदी ने जारी किया किसान सम्मान निधि की 16वीं किस्त, आपको मिली या नहीं ऐसे चेक करें

पीएम किसान सम्मान निधि योजना इससे पहले अपनी 15 वी किस्त किसानों के खाते मे जमा की थी जिसको खुद प्रधानमंत्री ने जारी किया था लेकिन इस बार भी अपनी 16 वी किस्त भी जारी की है जिसको खुद प्रधानमंत्री ने जानकारी देकर बताया है 


इन तरीको से जान सकते है की खाते मे पैसे आए है या नहीं 

अगर आप लाभार्थी हैं, तो आप मैसेज के जरिए किस्त के पैसे चेक कर सकते हैं। दरअसल, आपको सरकार की तरफ से और बैंक की तरफ से भी मैसेज मिलता है जिसमें किस्त के 2 हजार रुपये के ट्रांसफर होने जानकारी दी होती है।

अगर किसी कारण आपके पास किस्त आने का मैसेज नहीं आया है, तो ऐसे में आप अपने नजदीकी एटीएम में जाकर मिनी स्टेटमेंट निकलवाकर चेक कर सकते हैं कि खाते में 16 वीं किस्त के पैसे आए हैं या नहीं 

आप अपने बैंक ब्रांच में जाकर पासबुक एंट्री करवाकर इस बारे में पता कर सकते हैं किस्त के पैसे खाते में ट्रांसफर हुए हैं या नहीं और अपने मोबाईल मे सभी मैसेज और बैंक से जानकारी के मैसेज को ध्यान से पड़ कर रखे और सारी जानकारी को ध्यान मे रखे 

योजना में जिन किसानों ने अपनी ई-केवाईसी, भूलेखों का सत्यापन और स्कीम में रजिस्ट्रेशन करते समय गलत जानकारी दी थी उनके खाते में 16वीं किस्त के पैसे नहीं आए हैं इसका कारण है गलत जानकारी के चलते इसलिए फॉम को सत्यापन करते सामय ध्यान रखने की जरूरत है 

जिन किसानों के खाते मे पैसे नहीं आए है वो हेल्पलाइन नम्बर पर जानकारी ले सकते है 

करोड़ों किसानों को खाते मे पैसे डालकर प्रधानमंत्री ने सभी किसानों को सौगात दी है ये धनराशि पा कर किसान बहुत खुश है 

पीएम नरेंद्र मोदी ने जारी की 16वीं किस्त। डीबीटी के माध्यम से करोड़ों किसानों के खाते में भेजे गए 21 हजार करोड़ रुपये

अगर किस्त नहीं आई है तो ऐसे चेक कर सकते है की किस्त आई है या नहीं 

1. पहले पीएम किसान योजना के आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर जाएं

2. इसके बाद आपको 'बेनिफिशियरी लिस्ट' वाले ऑप्शन पर क्लिक करना है

पूरी जानकारी लेने के बाद इसको सही से करना पड़ता है इसकी बाद किसनों को इसका बहुत फायदा मिलता है

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मंगलवार, 19 जुलाई 2022

मछली पालन के लिए सरकार दे रही 60% तक अनुदान,कम खर्च मे करें शुरूआत!

आपको बता दूं पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुसूचित जाति के किसानों और महिलाओं को मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने के के लिए सरकार के तरफ से 60 प्रतिशत अनुदान मिलता है,अन्य किसानो को 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा!
खेती-किसानी और पशुपालन के बाद किसान सबसे ज्यादा मछली पालन कर अपना आमदनी करते हैं. इस बिजनेस में किसान कम से कम लागत में ज्यादा मुनाफा हासिल कर सकते है... किसानों के बीच मछली पालन का चलन बढ़े, इसके लिए सरकार भी कई तरह की योजनाएं लॉन्च करती रही है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भी कुछ इसी तरह की योजना हैं इस योजना के तहत मछली पालन करने वाले किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा! 

 नीचे दिए वेबसाइट से करे आवेदन!

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बुधवार, 16 फ़रवरी 2022

इस गलती के कारण किसान कर रहे खेत और फसलों को बर्बाद,जानिए यूरिया खेतो लिए है कितना खतरनाक!


यूरिया एक कार्बनिक पदार्थ है। इसमें कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन होते हैं जो रंगहीन, गंधहीन ठोस, पानी में अत्यधिक घुलनशील और व्यावहारिक रूप से गैर-विषाक्त है । यह पूर्णत: पानी में घुलनशील है इसलिए फसलों को लिए नाइट्रोजन आसानी से उपलब्ध होता है । इसमें 46.0% नाइट्रोजन सहित एक उच्च संकेंद्रित ठोस उर्वरक है जो नरम रूप में होती है फिर अमोनिया के रूप में परिवर्तित हो जाती है और मिट्टी कोलायड्स द्वारा लंबी अवधि तक पुन: प्राप्त की जाती है। पानी में घुलने पर, यह न तो अम्लीय होता है और न ही क्षारीय।
यूरिया का व्यापक रूप से उर्वरकों में नाइट्रोजन के स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है और यह रासायनिक उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। यह स्तनधारी और सरीसृप प्राणियों के मूत्र में पाया जाता है। खेतो में यूरिया का नाइट्रोजनयुक्त रासायनिक खाद के रूप में भी उपयोग होता है।
किसान यूरिया आदर्शत: में सभी प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त है और फोलर स्प्रे जो कि झटपट नाइट्रोजन की कमी को दूर करता है । किसान यूरिया फसलों पर अपना ठोस एवं लंबा प्रभाव छोड़ता है और परिणामस्वरूप अच्छी फसल होती है । किसान यूरिया में विद्यमान कार्बोनिक एसिड अन्य न्यूट्रेंट्स जैसे कि फास्फेट एवं पुटाश को फसल की जड़ों के द्वारा शोषित करने में सहायक होती है ।
यूरिया का उपयोग मुख्य रूप से कृषि, रेजिन, प्रयोगशाला, मेडिकल, विविध, विस्फोटकों, ऑटोमोबाइल सिस्टम में किया जाता है।
हर फसल को वृद्धि करने मै मिट्टी से पोसक् तत्व की आवश्यकता होती है। और उन मै से एक नाइट्रोजन की भी पौधे को आधिक से अधिक जरूरत होती ही है। और हम नाइट्रोजन की कमी को पुरा करने के लिए यूरिया का एस्तेमाल करते हैं। यूरिया मै 46% नाइट्रोजन पाया जाता हैं। आसान शब्दों मै कहा जाए तो हर अलग फसल अपने अनुसार नाइट्रोजन का प्रयोग करती हैं। परन्तु एक सामान्यतर आकड़े देखे जाए तो 1 बीघा में 16 या 17 किलोग्राम यूरिया की आवश्यकता होतीं हैं।

आईये अब जानते है यूरिया के फायदे और नुकसान

यूरिया खाद को पौधे मै डालने से पौधे की वृद्धि तेजी से होती है, पौधों मै रंग भी आता है और पीलापन छटने लगता हैं और हारापन आता है। और साथ ही फल मै भी काफी अच्छा प्रभाव होता है इससे फल का आकर पहले की तुलना में काफी बढा होता है। यूरिया खाद पौधे मे नाट्रोजन की कमी को भी पुरा करता है। और फसल को दो गुना बढ़ता है और पौधे मै नई पतियों का विकास करता है। यूरिया पौधे मै मिठास भी लाता हैं।

यूरिया का फसल पे कुछ अधिक उपयोग के कारण पर्यावरण प्रदूषित होता है। यदि हम बुआई के समय DAP तथा अन्य खाद दे रहे है तो यूरिया को न देवे। फसल पकते समय यूरिया न देव नही तो फसल मै भारी नुकसान हो सकता है।

भारत में यूरिया के 90% से अधिक औद्योगिक उत्पादन नाइट्रोजन मुक्त करने वाले उर्वरक के रूप में उपयोग के लिए नियत है। सामान्य उपयोग में आने वाले सभी ठोस नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों की तुलना में यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसलिए, नाइट्रोजन पोषक तत्व की प्रति यूनिट इसकी परिवहन लागत कम है। कुछ मिट्टी में, नाइट्रेट देने के लिए बैक्टीरिया द्वारा अमोनियम का ऑक्सीकरण किया जाता है, जो एक पौधे पोषक तत्व भी है। वायुमंडल के लिए नाइट्रोजनयुक्त यौगिक पर्यावरणीय रूप से हानिकारक है। इस कारण से, यूरिया को कभी-कभी इसके कृषि उपयोग की दक्षता बढ़ाने के लिए ढोंग या संशोधित किया जाता है। ऐसी ही एक तकनीक है नियंत्रित-रिलीज़ उर्वरक, जिसमें एक निष्क्रिय सीलेंट में यूरिया समाहित होता है।

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