सोमवार, 31 अक्टूबर 2022

भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ हुआ संपन्न

भगवान दीनानाथ से घर की सुख समृद्धि के लिए मांगा आशीर्वाद 

समस्तीपुर पूजा की शुरुआत नहाय खाय की परंपरा से होती है।उसके बाद खरना,संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य दिया जाता है। इससे ही छठ के पर्व का समापन होता है। जिले भर में महापर्व छठ सोमवार को समापन हो गया। चार दिन के इस त्योहार के आखिरी दिन श्रद्धालुओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया।


सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का समापन हो गया। अनुष्ठान के चौथे दिन छठ व्रतियों ने अहले सुबह स्नान ध्यान कर  पानी में खड़े होकर व हाथ जोड़ कर घंटों छठ घाट पर सूर्यदेव के आराधना में लीन रहे।भगवान सूर्य के उदीयमान  के समय सभी छठ व्रतियों ने अपने हाथों में फल व पकवान से भरा हुआ सूप डलिया लेकर अर्घ्य अर्पित कर परिवार के सुख  समृद्धि के लिए कामना की। इसके पूर्व रविवार की संध्या को भी श्रद्धालुओं ने पूरे परिवार के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर पूरे परिवार की कुशलता की कामना की। त्योहार को लेकर अनेक माता-बहन व श्रद्धालु भक्त कष्टी के रूप में व दंडवत देकर भी छठ घाट तक जाते दिखे। प्रात: कालीन अर्घ्य के पश्चात छठ व्रतियों द्वारा हवन व पूजा के पश्चात घाट पर प्रसाद का भी वितरण किया गया।

  इस दौरान श्रद्धालू भक्तों ने अपने व परिजनों के सुख समृद्धि के अलावे आरोग्य प्रदान करने के लिए प्रार्थना-अर्चना किया। समस्तीपुर बूढ़ी गंडक नदी के स्वच्छ जल के बीच जहां श्रद्घालु भगवान सूर्य की आराधना कर उन्हें अर्घ्य प्रदान किया। वहीं बच्चों ने घाट के किनारे जम कर आतिशबाजी की। पटाखे दुकान व घाटों पर छठ मैया के भक्ति गीतों से आस-पास का वातावरण गुंजायमान रहा। सोमवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय छठ संपन्न हो गया । शनिवार छठ व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला उपवास के बाद अन्न जल ग्रहण किया। लोक आस्था से जुड़ा जन जन का यह महापर्व आम लोगों के सहयोग से पूर्ण हुआ। इस दौरान छठ घाटों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी.जबकि कई पदाधिकारीगण मॉनिटरिंग कर रहे थे।वही स्थानीय विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन लगातार छठ घाटों का निरीक्षण कर लोगो को सुभकामनाए देते दिखे!





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रविवार, 30 अक्टूबर 2022

पालीगंज के कई छठ घाटों पर छठ ब्रतीयो ने दिया अस्तलगामी सूर्य को अर्घ्य

नववयुवक संघ की ओर से किया गया पूजा सामग्रियों व फलो का बितरण

पालीगंज/ लोक आस्था का पवित्र चार दिवसीय कार्तिक छठ पर्व के तीसरे व अंतिम दिन रविवार की शाम प्रखण्ड क्षेत्र के समदा गांव स्थित पुनपुन नदी घाट सहित कई घाटों पर छठ ब्रतीयो ने अस्तलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। वही खिरिमोड थाना क्षेत्र के बसंत बिगहा गांव के पास दहिया मोड़ पर नवयुवक संघ दहिया की ओर से फ्लो व पूजा सामग्रियों का बितरण किया गया।


जानकारी के अनुसार पहली अर्घ्य के पूर्व खिरिमोड थाना क्षेत्र के बसंत बिगहा गांव के पास दहिया मोड़ पर नवयुवक संघ दहिया की ओर से छठ ब्रतीयो के बीच पूजा सामग्रियों व फलो का बितरण किया गया. इस कार्य मे पूर्व मुखिया भोला यादव, पूर्व मुखिया संजय यादव, पत्रकार पंकज कुमार, गुड्डू यादव, भाई जितेंद्र यादव, बिनोद कुमार, शालिग्राम पंडित, अश्विनी कुमार, राजेश कुमार, विजय यादव, धर्मेंद्र कुमार, राजेश यादव, प्रेम कुमार, गजेंद्र कुमार, सोनू उर्फ कंचन, पंचम कुमार, राजीव कुमार, बिजेंद्र कुमार राजीव कुमार,संजय साव,रोहित कुमार, संजीत कुमार ,कौशल यादव,प्रवीण कुमार पिंटू पंडित, प्रमोद कुमार, ने सक्रिय भूमिका निभाया। जबकि समदा व बउआ गांव स्थित पुनपुन नदी घाट, निरखपुर गांव स्थित लोआई नदी घाट व मिल्की नहर घाट सहित अन्य घाटों पर हजारों की संख्या में छठ ब्रतीयो ने स्नान कर अस्तलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। साथ ही बसंत बिगहा सूर्य मंदिर, निरखपुर सूर्य मंदिर व मिल्की सूर्य मंदिर सहित अन्य मंदिरों में स्थापित सूर्य की प्रतिमाओं व कईं पूजा पंडालों में स्थापित सूर्य की प्रतिमा का पूजा अर्चना किया








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शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022

प्राणपुर के छठ घाटों का बीडीओ कुमार सौरभ ने किया निरीक्षण

नेशन संवाद संवाददाता कटिहार।

लोक आस्था का महापर्व को लेकर जिले के प्राणपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी कुमार सौरभ, अंचल अधिकारी नलनी कान्त, रोशना ओपी थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने छठ व्रतियों के लिए छठ घाटों की साफ सफाई का जायजा लिया। प्रखंड स्थित विभिन्न छठ घाटों का सफाई कार्य से जुड़े सभी संबंधित कर्मियों के दल के साथ स्थल का भौतिक निरीक्षण किया।


इसी कड़ी में प्रखंड क्षेत्र में स्थित ननसूरी घाट का निरीक्षण करते हुए ससमय इन छठ घाटों की बेहतर साफ सफाई करने को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए एवं छठ व्रतियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध संसाधन के अनुरूप सभी आवश्यक व्यव्यस्था किये जाने का आदेश दिया है। आगामी 30 नवम्बर को छठ पर्व मनाया जाएगा। संपूर्ण बिहार राज्य सहित प्राणपुर प्रखंड में भी कई मुख्य छठ घाटों पर हजारों की संख्या में छठव्रतियों के साथ साथ उनके परिजन छठ मैया की आराधना हेतु उपस्थित होते हैं । जिसको लेकर सभी छठ घाटों पर अपार भीड़ एकत्रित होती है । हिंदू आस्था का महापर्व छठ पर्व में होने वाली अपार भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्राणपुर प्रशासन साफ सफाई के साथ-साथ छठ घाट पर होने वाली सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर काफी तत्पर नजर आ रहा है। सभी छठ घाटों के निरीक्षण के उपरांत अंचल अधिकारी नलनी कान्त ने घाट पर छठ व्रतियों के कपड़े बदलने को लेकर छोटे-छोटे चेंजिंग रूम बनाने का निर्देश दिया। ऊधर सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा आज से आरंभ होने जा रही है। नहाए खाए के सात तीन दिवसीय पर्व की शुरुआत होगी। निर्जल निराहार व्रत रखने से पूर्वज व्रत कद्दू से बने विशेष कद्दू भात का सेवन करेंगे। इसके पीछे धार्मिक मान्यता भी है पंडित परशुराम झा के अनुसार सनातन धर्म में प्रकृति की आराधना करना सिखाया गया। विशेषकर सूर्य छठ मैं सूर्योदय के साथ सूर्यास्त की भी पूजा की जाती है। नैतिकता के आधार पर यह संदेश भी है कि सनातन अनु यानी अच्छे के साथ बुरे वक्त का भी साथी होता है। ज्ञात हो कि आस्था का महापर्व छठ पूजा की तैयारी जोरों शोरों से की जा रही है। हर चौक चौराहे पर छठ भक्ति गीत की धूम मची हुई है। चारों तरफ छठ पूजा की जय कार हो रही है। नहाए खाए के साथ छठ पूजा अर्चना में लोग लगे हुए हैं। वहीं पश्चिम बंगाल के श्रद्धालु बिहार के महानंदा नदी लाभा पुल एवं बाबूपुर घाट पर हजारों की तादाद में पश्चिम बंगाल तथा बिहार के सभा में पहुंचकर स्नान किया छठ पूजा को लेकर पूरा क्षेत्र भक्ति में बना हुआ है।






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गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022

हसनगंज:- महापर्व छठ को लेकर छठ घाटों में चलाया गया साफ-सफाई अभियान।

नेशन संवाद संवाददाता  हसनगंज


हसनगंज प्रखंड के कालसर पंचायत अंतर्गत महनौर छठ घाट में महापर्व छठ को लेकर मुखिया सागर यादव की अगुवाई में ग्रामीणों ने सफाई अभियान चलाया. ग्रामीणों के साथ मुखिया ने भी हाथ में झाड़ू लेकर सफाई अभियान में हिस्सा लिया. जिसको लेकर मुखिया सागर यादव ने बताया कि महापर्व छठ को देखते हुए छठ व्रतियों को पूजा पाठ करने में सुविधा हो इसको लेकर पंचायत स्तर पर सभी छठ घाटों में साफ-सफाई अभियान की शुरुआत की जा रही है. जिसमें महानौर छठ घाट में ग्रामीणों के साथ मिलकर साफ सफाई अभियान चलाया गया. मौके पर सभी ग्रामीण हाथ में झाड़ू लेकर घाटों की साफ-सफाई करते हुए स्वच्छता का प्रण लिया. बताया स्वच्छता में ही ईश्वर का


वास है, इसलिए पूजा पाठ साफ सुथरे जगह पर होना चाहिए. सफाई अभियान दौरान मुखिया सागर यादव ने बताया कि अधिकांश छठ घाटों में पक्की छठ घाट का निर्माण कार्य शुरू किया गया है. जल्द ही सभी छठ घाटों में पक्की छठ घाट का पुर्ण निर्माण कार्य करा दिया जाएगा. मुखिया सागर यादव ने महापर्व छठ को शांतिपूर्ण माहौल मनाने को लेकर आमजनों से अपील करते हुए कहा कि गहरे पानी में बेरेकेटिंग व लाल झंडे का निशान लगाया जाएगा ताकि लोग सुरक्षित अर्घ्य अर्पण कर सके. साथ ही महिला छठ व्रतियों के कपड़े बदलने के लिए केबिन की बनाएं जाने पर चर्चा किया. इस अवसर पर मुखिया के साथ दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।






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नहाय-खाय के साथ आज से शुरू होगा लोकआस्थ का महापर्व छठ

नेशन संवाद संवाददाता मोतिहारी। 

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ व्रत आज नहाय खाय के साथ प्रारंभ हो जाएगा। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का महापर्व है मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है।


स्त्री और पुरुष समान रूप से इस पर्व को मनाते हैं ।उक्त बातें आचार्य कृष्णानन्द दुबे  ने बताया कि चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई ,छठ, सूर्य षष्ठी पूजा इत्यादि कई नामों से जाना जाता है।आचार्य कृष्णानन्द दुबे ने छठ महापर्व के बारे में बताते हुए कहा कि पुराणों के मुताबिक राजा प्रियंवद को कोई संतान नहीं थी। तब महर्षि कश्यप ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद  कीजिए पत्नी मालिनी को यज्ञ आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इससे उन्हें पुत्र हुआ लेकिन वह मृत पैदा हुआ। प्रियंवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और उन्होंने कहा, "सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूं राजन तू मेरी पूजा करो और इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करो"। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी। एक मान्यता के अनुसार, लंका पर विजय पाने के बाद राम राज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्य देव की पूजा की।सप्तमी को सूर्योदय के वक्त फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था । यही परंपरा तब से अब तक चली आ रही है।






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