रविवार, 24 अप्रैल 2022

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि-खरीफ अभियान -2022 पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

New Delhi/ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने NASC कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में खरीफ अभियान 2022-23 के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य पूर्ववर्ती फसल मौसमों के दौरान फसल के प्रदर्शन की समीक्षा और मूल्यांकन करना और राज्य सरकारों के परामर्श से खरीफ मौसम के लिए फसल-वार लक्ष्य निर्धारित करना एवं विभिन्न उत्पादन समग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करना और और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने की दृष्टि से नवीन तकनीकों को अपनाने की सुविधा प्रदान करना है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संतोष व्यक्त किया कि दूसरे अग्रिम अनुमान 2021-2022 के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 3,160 लाख टन होने का अनुमान है जो एक सर्वकालिक रिकॉर्ड होगा। दलहन और तिलहन का उत्पादन क्रमश: 269.5 और 371.5 लाख टन होगा।तीसरे उन्नत अनुमान के अनुसार, 2020-2021 के दौरान बागवानी उत्पादन 3310.5 लाख टन है जो भारतीय बागवानी के लिए अब तक का सबसे अधिक है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसानों के लिए लागत कम करने के लिए कीटनाशकों और बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने आग्रह किया कि यूरिया को नैनो-यूरिया से बदलने की रणनीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता कृषि-पारिस्थितिकी आधारित फसल योजना है, जो चावल और गेहूं जैसी अतिरिक्त वस्तुओं से तिलहन और दालों जैसी कम वस्तुओं और उच्च मूल्य वाली निर्यात कमाई वाली फसलों के लिए है। सरकार तिलहन और दलहन में आत्मनिर्भरता और पाम ऑयल को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करते हुए फसल विविधीकरण को उच्च प्राथमिकता दे रही है। देश में फसल विविधीकरण कार्यक्रम के लिए एक राष्ट्रीय नीति रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए प्रमुख राज्यों, शोधकर्ताओं, उद्योगों और नीति निर्माताओं जैसे सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया गया है। कृषि को टिकाऊ, लाभदायक और घाटे वाली वस्तुओं में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी राज्यों को फसल विविधीकरण की दिशा में काम करना चाहिए सम्मेलन ने वर्ष 2022-2023 के लिए कुल खाद्यान्न उत्पादन का राष्ट्रीय लक्ष्य 3280 लाख टन निर्धारित किया, जबकि चालू वर्ष के दौरान 3160 लाख टन उत्पादन का अनुमान था। 2022-2023 में दलहन और दलहन के उत्पादन का लक्ष्य 295.5 और 413.4 लाख टन निर्धारित किया गया है। न्यूट्री-अनाज का उत्पादन 2021-2022 में 115.3 से बढ़ाकर 2022-2023 में 205.0 लाख टन करना है। रणनीति अंतर-फसल और फसल विविधीकरण और उच्च उपज वाले विभिन्न प्रकार के बीज की शुरूआत के माध्यम से उत्पादकता वृद्धि और कम उपज वाले क्षेत्रों में उपयुक्त कृषि पद्धतियों को अपनाने के माध्यम से क्षेत्र में वृद्धि करने की होगी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि देश में 2015-2016 से खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले 6 वर्षों में कुल खाद्यान्न उत्पादन 251.54 से बढ़कर 316.01 मिलियन टन हो गया है। तिलहन ने भी इसी प्रवृत्ति का अनुसरण किया है और 2015-2016 में 25.25 मिलियन टन से 42% की वृद्धि दिखाई है और 2021-2022 में 37.15 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। भारत के कृषि उत्पादों का निर्यात 2021-2022 के दौरान 19.92% बढ़कर 376575 करोड़ रुपये हो गया है। गेहूं, अन्य अनाज, चावल , कच्चा कपास, ताजी सब्जी और संसाधित जैसी वस्तुएं। सब्जियों आदि में सर्वाधिक सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, "हमें ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि और बागवानी क्षेत्रों के उत्पादन और उत्पादकता में तेजी लानी होगी। सरकार ने कई विकास कार्यक्रमों, योजनाओं, सुधारों और नीतियों को अपनाया है जो किसानों के लिए उच्च आय पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सभी तिलहनों के लिए 3 साल की कार्य योजना आवंटन के साथ 381.95 करोड़ रुपये के आवंटन से अगले 3 वर्षों में कुल 14.7 लाख क्विंटल नए उच्च उपज वाले विभिन्न प्रकार के बीज के गुणवत्ता वाले बीज का उत्पादन किया जाएगा। कृषि आयुक्त डॉ. ए.के. सिंह ने खरीफ सीजन में फसल प्रबंधन की रणनीतियों पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए कहा कि सरकार के समय पर हस्तक्षेप के कारण देश ने अब तक का सबसे अधिक खाद्यान्न, तिलहन और बागवानी उत्पादन दर्ज किया है। अब तिलहन, दलहन और पोषक-अनाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मानसून के बाद, सामान्य से अधिक वर्षा हुई है और गर्मियों के दौरान लगभग 55.76 लाख हेक्टेयर में खेती की जा रही थी। सरकार की नीति के बाद, दलहन और तिलहन की खेती में इसी वृद्धि के साथ चावल के तहत क्षेत्र में कमी आई है। सरकार ने बीज और उर्वरक की आवश्यकता पर काम किया है और उनकी समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। सचिव ने आगामी सीजन के लिए उर्वरक आपूर्ति की स्थिति पर विचार-विमर्श किया। 2023 में पोषक-अनाज के उत्पादन में वृद्धि और मिलों पर अंतर्राष्ट्रीय वर्ष मनाने के लिए की गई नई पहलों के लिए विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। आरकेवीवाई के तहत कैफेटेरिया दृष्टिकोण और कृषि मशीनीकरण के लिए उप-योजनाओं को राज्यों के लाभ के लिए साझा किया गया। डिजिटल कृषि, पीएम-किसान और प्राकृतिक खेती पर भी प्रस्तुतियां दी गईं।

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मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

JNU: होस्टल में नॉनवेज खाने को लेकर ABVP कार्यकर्ताओं ने किया मारपीट!

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों ने होस्टल में नॉन वेज फूड खाने से रोका। लेफ्ट विंग के छात्रों ने यह आरोप लगाया कि एबीवीपी के छात्रों ने कावेरी हॉस्टल के मेस सचिव से मारपीट भी की।
लेफ्ट विंग के छात्रों ने एबीवीपी छात्रों पर जेएनयू परिसर में गुंडागर्दी का आरोप लगाते हुए छात्रों को एकजुट होने का आह्वान किया है।वहीं एबीवीपी का आरोप है कि लेफ्ट विंग के छात्र कावेरी हॉस्टल में रामनवमी की पूजा नहीं करने दे रहे हैं। इस फूड कॉन्ट्रोवर्सी पर यूनिवर्सिटी की ओर से एक नोटिस जारी किया गया है। यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया है कि जेएनयू कैंपस के मेस में किसी भी धर्म के लिए खाने-पीने के लिए कोई पाबंदी नहीं है। यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई मनाही नहीं है। चाहे रमजान हो या रामनवमी... हर कोई इसे अपने तरीके से मना सकता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी के भी पहनावे पर, खाने पर और आस्था पर रोक टोक नहीं कर सकते हैं। सभी लोग अपने हिसाब से अपने धर्म का पालन करते हैं। मेस स्टूडेंट कमेटी चलाती है और मेन्यू वही तय करते हैं।

जेएनयू स्टूडेंट यूनियन(JNUSU) की ओर से कहा गया है कि एबीवीपी के गुंडों ने अपनी नफरत की राजनीति और विभाजनकारी एजेंडे को लेकर कावेरी हॉस्टल में हिंसक माहौल बना दिया है। वे मेस कमेटी को रात के खाने के मेन्यू को बदलने के लिए मजबूर कर रहे हैं और मेस से जुड़े लोगों के साथ लेफ्ट विंग के छात्रों पर हमला कर रहे हैं। मेन्यू में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के फूड हैंं। छात्र अपनी पसंद के मुताबिक कोई भी खाना ले सकते हैं। लेकिन एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने गुंडागर्दी कर हंगामा किया। साथ ही मेस के कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने मेस के कर्मचारियों से नॉनवेज फूड नहीं बनाने का दबाव डाला।
स्टूडेंट यूनियन की ओर से कहा गया है कि जेएनयू और उसके हॉस्टल सभी के लिए एक जैसा है। यहां रह रहे छात्र अलग-अलग इलाकों से होते हैं और उनकी संस्कृति, खान-पान भी अलग-अलग होता है, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए। एबीवीपी का यह कदम जेएनयू जैसे लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष स्थानों पर आधिपत्य जमाने की उनकी राजनीति और दक्षिणपंथी हिंदुत्व नीतियों को दर्शाता है।स्टूडेंट यूनियन ने कहा कि जेएनयू के छात्र इस तरह की विभाजनकारी चालों के आगे नहीं झुकेंगे और इस तरह की घटनाओं के खिलाफ लड़ना जारी रखेंगे। जेएनयू स्टूडेंट यूनियन छात्रों से सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट होने की अपील करता है। ऐसी किसी भी विभाजनकारी शक्तियों का डटकर मुकाबला किया जाना चाहिए और जेएनयू समुदाय को एकजुट होकर दोहराना चाहिए कि ऐसे किसी भी कृत्य के खिलाफ जीरो टॉलरेंस होगा।

वहीं इस हिंसा पर बिरसा अम्बेडकर फूले स्टूडेंट्स एसोसिएशन(BAPSA) ने कहा कि एबीवीपी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी गुंडागर्दी की कोई सीमा नहीं है। एबीवीपी बार-बार लोकतांत्रिक आचरण का पालन करने में विफल रहता है जैसे कि किसी भी प्रकार की बातचीत या चर्चा का उपयोग करना। हिंसा, डराने-धमकाने, गुंडागर्दी और छात्रों पर हमला करने का यह उसका एकमात्र रास्ता है जिस पर उसने बार-बार भरोसा किया है। बार-बार इसने अपनी ध्रुवीकरण परियोजना के साथ परिसर के सामाजिक स्वास्थ्य और सद्भाव को बाधित करने का प्रयास किया है। कई छात्र घायल हैं और वर्तमान में अस्पताल में भर्ती हैं; कई छात्राओं को प्रताड़ित किया गया और बलात्कार की धमकी दी गई। एबीवीपी सदस्यों ने मोटरसाइकिलों में तोड़फोड़ की और घटनाओं को रिकॉर्ड करने वाले लोगों के मोबाइल फोन तोड़ दिए। यह सब दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में हुआ है। पुलिस जाहिर तौर पर हिंसक एबीवीपी को बचा रही है। बापसा एबीवीपी और उसके गुंडों द्वारा की गई हिंसा की निंदा करती है।

बापसा ने कहा, "आज से 14 अप्रैल तक फुले-आंबेडकर जयंती मनाते हुए, हम ब्राह्मणवाद का मुकाबला करने की क्रांतिकारी संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे, जिसे एबीवीपी धमकी और हिंसा के माध्यम से प्रचारित कर रही है। फुले-आंबेडकर जयंती का हमारा उत्सव इस ब्राह्मणवादी ताकत के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में खड़ा होगा और विश्वविद्यालय के स्थान को पुनः प्राप्त करेगा जो कि हमारा अधिकार है। हम एबीवीपी के खिलाफ प्रतिरोध को बनाए रखते हुए ब्राह्मण-विरोधी प्रतीक और संस्कृति के साथ-साथ क्रांतिकारी आंदोलनों का जश्न मनाएंगे।"

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शनिवार, 26 मार्च 2022

मशहूर गायक राजा सिंह, 'विवेकानंद कंज़रवेटरी' में म्यूज़िक मेंटर के पद में नियुक्त हुए

125 संगीत प्रतिभागियों में से राजा सिंह टॉप 3 में शामिल हुए!
दिल्ली | राजा सिंह संगीत की दुनिया में एक जाना माना नाम है ! पिछले कुछ वर्षो में राजा सिंह ने संगीत सीखाने और गायन के क्षेत्र में एक से एक अवार्ड और कई बड़े कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दी! वर्ष 2019 में वे मासा इंडिया मेंटर अवार्ड और 2020 में युथ इंडिया का नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड भी मिला ! हाल ही में दिल्ली की बेस्ट विवेकानंद कंज़रवेटोरी ने राजा सिंह को म्यूज़िक मेंटर के पद में नियुत्क किया ! देश के 125 संगीत प्रतिभागियों में से राजा सिंह टॉप 3 में शामिल हुए ! इससे पहले राजा सिंह ने अपनी सेवाएं डॉ किरण बेदी के फाउंडेशन, इंडिया विज़न में दे चुके है जिसमे उनकी संगीत सीखाने और बेहतर प्रदर्शन के लिए सोनी पीक्चर नेटवर्क के संजोयन से बेस्ट मेंटर का भी अवार्ड मिला ! राजा सिंह ने अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय अपने माता पिता और गुरु को दिया है !



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शनिवार, 26 फ़रवरी 2022

रूस-यूक्रेन युद्ध का ऑटो उद्योग पर असर, भारत में महंगी हो सकती हैं कारें; बढ़ेंगी ये समस्याएं

रूस यूक्रेन युद्ध का बुरा असर ऑटो उद्योग पर भी पड़ा है। वाहन निर्माता वोक्सवैगन और रेनॉल्ट समेत कई कंपनियों ने अपना उत्पादन वहां बंद या उसे स्थानंतरित करने का निर्णय लिया है। आने वाले दिनों में कारों की कीमतों में वृद्धि देखी जा सकती है। आइए जानें इसका कारण।
यूक्रेन पर रूस के हमले का उद्योग जगत पर भी काफी बुरा असर देखने को मिल रहा है। इसका असर ऑटो उद्योग पर भी पड़ा है। वाहन निर्माता वोक्सवैगन, रेनॉल्ट और टायर निर्माता नोकियन टायर्स समेत कई कंपनियों ने शुक्रवार को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद उत्पादन कार्यों को बंद करने या वहां से स्थानांतरित करने की योजना की रूपरेखा तैयार की है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने गुरुवार को रूस के खिलाफ व्यापक निर्यात प्रतिबंधों की घोषणा की है। कॉमर्शियल इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर से लेकर सेमीकंडक्टर और विमान के पार्टस जैसे जरूरी सामानों के वैश्विक निर्यात तक अपनी पहुंच को कम कर दिया। इससे कंपनियां विनिर्माण योजनाओं में बदलाव कर सकती हैं या वैकल्पिक आपूर्ति लाइनों की तलाश कर सकती हैं।
कोविड-19 के वजह से वैश्विक सेमीकंडक्टर की कमी के चलते ऑटो उद्योग पहले से ही वाहनों की तंग आपूर्ति से जूझ रहा था। ऐसे में यूक्रेन पर रूस का हमला बहुत ही घातक साबित होता हुआ दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि यूक्रेन और रूस में कई ऐसी वस्तुओं का उत्पादन होता है, जिसे ग्लोबल लेवल पर इक्सपोर्ट किया जाता है। आपको बता दें कि रूस में बड़ी मात्रा में पैलेडियम धातु पाई जाती है। रूस इस धातु (पैलेडियम) का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। पैलेडियम का इस्तेमाल गाड़ियों से निकलने वाली जहरीली गैसें जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के असर को कम करने के लिए होता है!आपको शायद ही पता होगा कि पेट्रोल और हाइब्रिड गाड़ियों के एग्जॉस्ट में इस्तेमाल होने वाले कैटेलिटिक कनवर्टर पैलेडियम से तैयार किए जाते हैं। इस युद्ध के कारण इस धातु की सप्लाई चैन बाधित होगी और कीमतों में वृद्धि होगी, जिसके कारण भारत में गाड़ियों की कीमतों पर असर देखने को मिल सकता है।रूस और यूक्रेन सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ-साथ महत्वपूर्ण गैसों और धातुओं का उत्पादन करते हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद इस युद्ध का सीधा असर इन पर हुआ है!
आपको जानकर हैरानी होगी एक दिसंबर 2021 को क्रूड ऑयल की कीमत 68.87 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर हो चुकी है। वहीं, गुरुवार की शाम क्रूड ऑयल की कीमत 105.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। बताते चलें कि दोनों ही देशों में बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक कार और उनमें लगने वाली बैटरी की मैन्यूफैक्चरिंग की जाती है। इस युद्ध के कारण इलेक्ट्रिक गाड़ियों और उनमें लगने वाली बैटरी पर भी बुरा असर पड़ेगा। इससे सप्लाई चैन बाधित होगी और उनकी कीमतें बढ़ेंगी। आने वाले दिनों में भारत समेत वैश्विक ऑटो उद्योग पर इसका बुरा असर देखने को मिल सकता है। भारत में भी कारों के दाम बढ़ सकते हैं।


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रविवार, 6 फ़रवरी 2022

आज भाजपा का 'लोक कल्याण संकल्प जारी करेंगे अमित शाह, उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली/लखनऊः भारतीय जनता पार्टी द्वारा विधानसभा चुनाव-2022 के लिए 'लोक कल्याण संकल्प पत्र' (चुनावी घोषणा पत्र) रविवार को जारी किया जाएगा।यह संकल्प पत्र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जारी करेंगे। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनीष दीक्षित ने शनिवार को यह जानकारी दी।

दीक्षित ने मीडिया को बताया कि भाजपा प्रदेश मुख्यालय में होने वाले कार्यक्रम में अमित शाह संकल्प पत्र जारी करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, सह प्रभारी अनुराग ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, संकल्प पत्र समिति के अध्यक्ष सुरेश खन्ना सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे।

भाजपा के इस चुनावी घोषणा पत्र के लिए 15 दिसंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 'आकांक्षा पेटी' की शुरुआत कर प्रदेश भर से सुझाव मांगे गए थे। प्रदेश मीडिया प्रभारी ने दावा कि भाजपा ने वर्ष 2017 में जारी किए गए संकल्प पत्र के सभी संकल्पों को चरितार्थ किया।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो कहा है, वह किया है और इस बार 'सोच ईमानदार, काम असरदार, यूपी फिर मांगे भाजपा सरकार' की थीम पर जनता के बीच अपने असरदार काम को लेकर आए हैं!

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