शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

पदाधिकारियों के साथ डीएम ने की विकास के कार्यो की समीक्षा

डीएम ने नगर परिषद को दिया आदेश हाजीपुर शहर का ड्रोन के माध्यम से कराए रिकार्डिंग 

हाजीपुर डीएम श्री यशपाल मीणा के द्वारा जिले में चल रहे विकास के कार्यों की समीक्षा के लिए तकनीकी विभाग के पदाधिकारी एवं कार्यपालक अभियंताओं के साथ अपने कार्यालय कक्ष में बैठक की गयी।इस बैठक में बारी-बारी से एक-एक विभाग के कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गयी। सर्वप्रथम वुडको के अभियंता ने बताया कि शहर को जल जमाव से मुक्त करने के लिए कुल 138 किलोमीटर पाईप बिछाने का लक्ष्य रखा


गया था जिसके विरूद्ध 103 किमी पाईप बिछा दिया गया है। वर्तमान में सुभाष चौक से रामाशीष चौक तक पाईप बिछाने का कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि सिवरेज नेटवर्क के अन्तर्गत कुल चार आईपीएस बनाना था जिसमें तीन का कार्य चल रहा है और एक में रेलवे से एनओसी लेना है। घाट निर्माण कार्य के लक्ष्य का पचास प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। अभी बूटन दास घाट और सीढ़ी घाट के पास कार्य किया जाना है, परन्तु जल स्तर बढ़ा होने के कारण थोड़ा विलम्ब हो रहा है। उनके द्वारा बताया गया कि अमृत योजना के तहत शुद्ध पेयजल के लिए पाईपलाईन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। अब इसका इण्टरकनेक्शन किया जा रहा है। कार्यपालक अभियंता भवन के द्वारा बताया गया कि सहकारिता भवन और आईटीआई हाजीपुर तथा महनार का निर्माण कार्य प्रगति पर है और इसे ससमय पूरा किया जाएगा। कृषि के तीन प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है जिसमें दो देसरी में एवं एक खोपी में है। यहाँ मिट्टी भरायी और चाहरदिवारी का निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महनार में नया रजिस्ट्री कार्यालय तथा लालगंज में 10 कमरों का मदरसा बनना है जिसकी प्रक्रिया चल रही है।वहीं पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि वैशाली प्रखंड अन्तर्गत निर्माणाधीन बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय के लिए एप्रोच पथ की निविदा प्रक्रिया चल रही है। लालगंज बाईपास का निर्माण होना है। जिसके लिए वन विभाग एवं सिंचाई विभाग से एनओसी की मांग की गयी है इसके लिए दोनों विभागों को पत्र लिखा गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व की सभी योजनाएँ लगभग पूर्ण होने की स्थिति में है।कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद हाजीपुर के द्वारा बताया गया कि शहर के विकास के लिए कुल 12 योजनाएँ ली गयी थी जिसमें 5 पूर्ण है और 7 पर कार्य चल रहा है। अगले दस दिनों में वेंडिंग जोन भी बन कर तैयार हो जाएगा।डीएम के द्वारा शहर को स्वच्छ रखने के लिए अभियान चलाने और इसके तहत सोमवार से 40 सफायी कर्मियों की टीम एक वार्ड में भेजने का निर्देश दिया गया। डीएम ने कहा कि नालियों की सफायी की नियमित व्यवस्था करायें और दुकान के सामने अगर नाली जाम हो रही है अथवा अतिक्रमण या प्लास्टिक की सामग्रियाँ पायी जाय तो उसके विरूद्ध कड़ी दण्डात्मक कार्रवाई करें और बार-बार ऐसा पाये जाने पर दूकान को सील कर दिया जाय।डीएम के द्वारा सभी टैक्स कलेक्टरों के कार्यों का नियमित रूप से समीक्षा करने ओर खराब प्रदर्शन वाले को सेवा मुक्त करने का निर्देश दिया गया।डीएम के द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद को पूरे हाजीपुर शहर का ड्रोन के माध्यम से रिकार्डिंग कराने का निर्देश दिया गया ताकि यह पता चल सके कि कहाँ पर क्या है। जिलाधिकारी ने कहा कि कोनहारा घाट के आस-पास के क्षेत्र में स्वाभाविक रूप से जल निकासी कैसे हो, अगर पाईप के द्वारा यह सम्भव है तो इस क्षेत्र का सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया जाय। जदुआ-महनार एनएच-22 बी के कार्यपालक अभियंता जो बिहार शरीफ में बैठते है। डीएम ने फोन पर वार्त्ता कर इस सड़क को अगले एक सप्ताह में ठीक करा देने का निर्देश दिया गया।बैठक में ग्रामीण कार्य विभाग, लघु सिंचाई विभाग, बाढ़ नियंत्रण एवं पीएचईडी के कार्यों की भी समीक्षा की गयी।

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सोमवार, 31 अक्टूबर 2022

उदितमान भास्कर को अर्ध्य देने के साथ चार दिवसीय छठ पूजा हुआ संपन्न

हाजीपुर लोक आस्था के महापर्व छठ उदितमान सूर्य देव को अर्ध्य देने के साथ हीं सम्पन्न हो गया। सोमवार को छठ व्रतियों ने पानी में खड़े होकर मौसमी फल व पूजा की अन्य सामग्री से भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया।


सुहाग व स्वास्थ्य की रक्षा को लेकर आराधना की। क्षेत्र के विभिन्न जलाशय, तालाब में खड़े होकर सूर्य देव को अर्ध्य दे रही महिलाओं ने कहा कि महापर्व छठ में गाया जा रहा गीत वेद मंत्र है। इस दौरान जगह जगह  पुलिस प्रशाशन का विशेष सहयोग रहा ।  चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ सोमवार को उदितमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। जिले के विभिन्न छठ घाटों में इस पूजा की धूम रही।छठ घाटों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर लोंगों ने धने-धान्य, पुत्र, यश, ऊर्जा भगवान भास्कर से मांगी। वहां छठ पर्व के दौरान गजब का उत्साह देखने को मिला। छठ घाटों पर इस दौरान आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा।हर ओर छठी मइया के गीत गुंजयमान होता रहा ।






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मंगलवार, 7 जून 2022

पटना से हाजीपुर अब सफर हुई आसान,सिर्फ़ 15 मिनट में पूरी होगी !

पटना इंतजार की घड़ियां खत्म और अब गांधी सेतु के दोनों लेन पर सरपट भागेंगी गाड़ियां। करीब छह साल में सेतु के सुपरस्ट्रक्चर को बदल कर इसे नया स्वरुप दिया गया है।गांधी सेतु पश्चिमी लेन का सुपरस्ट्रक्चर बदलकर इसे जून 2020 में चालू कर दिया गया था।अब सात जून से नए पूर्वी लेन पर भी वाहनों का आवागमन शुरु हो गया हैं। दोनों लेन पर निर्बाध रुप से वाहनों का आवागमन शुरू हो जाने के बाद पटना से हाजीपुर का सफर आसान होगा और करीब छह किलोमीटर की दूरी पंद्रह मिनट में पूरी की जा सकेगी।


उत्तर बिहार की लाइफ लाइन कहा जाने वाला, एशिया का सबसे लंबा पुल महात्मा गांधी सेतु पर 1983 से वाहनों का आवागमन शुरु किया गया था। लेकिन उचित रखरखाव नहीं होने के कारण निर्माण के पच्चीस वर्ष होते ही सेतु की स्थिति खराब होने लगी। भारी वाहनों का बेरोकटोक परिचालन और सेतु पर वाहनों का ठहराव होने से इसके स्पैन असर पड़ाऔरकई स्थानों पर यह काफी जर्जर हो गया।सेतु के जर्जर कंधों पर भी हर दिन चालीस हजार से अधिक वाहनों का दबाव था। अंतत: इसके पुर्ननिर्माण की योजना बनायी गयी और सेतु के 46 पायों को दुरुस्त पाते हुए इसके ऊपरी सतह का निर्माण कराने की रुपरेखा तैयार की गयी। वर्ष 2016 में सेतु पश्चिमी लेन की परत काटकर इसे स्टील की चादर वाली सुपरस्ट्रक्चर बनाने का काम शुरु किया गया। उस वक्त दो साल में पश्चिमी लेन और अठारह महीने में पूर्वी लेन को तैयार कर आवागमन शुरु करने का लक्ष्य रखा गया था। इस नवनिर्मित सेतु को मार्च 2020 में शुरू किया जाना था लेकिन विभिन्न कारणों से निर्माण में देरी होती गयी और दो साल बाद इसे पूरा किया जा सका।गांधी सेतु के दोनों लेन से वाहनों का परिचालन शुरु होते ही राजधानी में बड़े वाहनों का प्रेशर बढ़ेगा। खासकर जीरोमाइल, पहाड़ी मोड़, धनुकी मोड़ के पास ट्रैफिक व्यवस्था को चौबीसों घंटे दुरुस्त रखना होगा। सेतु से वाहनों का दबाव बढ़ते ही फोरलेन पर जाम की समस्या खड़ी न हो इसके लिए नई व्यव्स्था करनी होगी। बड़े वाहनों के डायवर्ट और ओवरटेक पर नजर रखनी होगी। जिससे कि भीषण जाम से बचा जा सके।
गंगा नदी पर पटना में सबसे पहले महात्मा गांधी सेतु पुल 1982 में बनाया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पुल का उद्घाटन किया था। हालांकि इस पुल की स्वीकृति 1969 में भारत सरकार द्वारा दी गई थी। 1972 से 1982 तक पुल निर्माण का कार्य चला था। पुल 10 वर्षों में बनकर तैयार हुआ था। इसपर 87.22 करोड़ की लागत आई थी। पुल में कुल 46 पाया है।








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