रविवार, 3 मार्च 2024

PM Kisan सम्मान निधि पाने के बैंको का चक्कर लगा थक गए किसान, कब होगा समस्या का समाधान?

किसानों के लिए बस रह गया है लाइन लगाकर खड़ा रहना चाहे वो नोटबन्दी के लाइन हो या फिर सम्मान निधि आने पर चाहे वो खेती का पैसा हो या फिर सम्मान निधि का बैंको पर लाइन लगानी पड़ती है इसके बाद मे सम्मान निधी के फॉर्म भरवाने के लिए लाइन लगाना हो सब कामों मे किसान को ही लाइन लगानी है पुराने समय से अब तक सब लोगों की बात को सुना जाता है सिर्फ किसानों की समस्या को कोई भी नहीं सुनता है 


प्रधानमंत्री सम्मान निधी पाने के लिए कृषि कार्यलयों मे अभी भी किसान लाइन लगा कर खड़े है वो अपना काम छोड़ कर पैसे निकालने के लिए सुबह से शाम तक लाइन मे खड़े है और परेशान हो रहे है किसी का आधार गलत है और किसी का फॉर्म भरा नहीं गया और किसी की बैंक की kyc नहीं हुई है और किसान इस समस्या का हल नहीl निकाल पा रहे है 

प्रधानमंत्री ने किसानों को सम्मान निधि की 16 वी किस्त किसानों के खातों मे डाल दी है लेकिन इसके साथ ही एक नई समस्या ने जन्म ले लिया है पैसे तो प्रधानमंत्री ने डाल दिए है लेकिन किसी के पास मैसेज नहीं आया है और किसी के खाते मे अभी तक पैसे नहीं आए है जिनके पैसे नहीं आए है उन किसानों की लाइन निर्देश कार्यलय पर लगी है लेकिन लोगों के समस्या और किस्त ना आने की जानकारी आधिकारियों के पास पहुँच रही है लेकिन इसका कोई भी समाधान हो रहा है लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रहे है शुक्रवार को उप कृषि निदेशक रोहतश कुमार ने बताया जिले मे कुल 2.30 किसान पी ए म किसान सम्मान निधी योजना मे पंजीकृत है अभी 16 वी किस्त किसानों के खाते मे आई है इसके वारे मे विभाग को कोई जानकारी नहीं है जिन किसानों के मोबाईल पर मैसेज नहीं आया है ऐसे किसान हेल्प डेस्क पर आकार जानकारी ले रहे है और बताया मोबाईल पर मैसेज बहुत दिनों का आएगा इससे ये सवाल उठ रहा है प्रधानमंत्री योजना का कुछ किसानों को इसका लाभ मिल रहा है और कुछ को नहीं

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गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

किसानों ने बनाई नई रणनीति,पटियाला और संगरूर में इंटरनेट सेवा बंद

MSP गारंटी कानून और अन्य मांगों को लेकर किसान आज अपने आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं किसानों का सीधा वयान है उनका बोलना है सरकार को हमारी बात को मानना पड़ेगा 

किसान आज अपने आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे एमएसपी गारंटी कानून बनाने और अन्य मांगों को लेकर किसान संगठन पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर पिछले 17 दिनों से डटे हुए हैं लेकिन किसानों की बात को सरकार ने अब तक नजरंदाज किया है लेकिन किसानों का कहना है वो सरकार को अपने आगे झुका कर रहेंगे और किसान को आंदोलन को देखते हुए पंजाब के पटियाला और संगरूर में इंटरनेट बंद कर दिया गया है इंटरनेट को बंद करने का कारण है जिससे गलत जानकारी इधर उधर ना जाए और सारे काम शांति से हो सके केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने बुधवार को कहा कि सरकार प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अभी तक कोई बैठक तय नहीं हुई है इसके लिए कितना समय लगेगा और इसके लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा 


उपद्रवियों की पहचान में जुटी हरियाणा पुलिस

किसान आंदोलन के दौरान उपद्रव करने वालों के खिलाफ अब हरियाणा पुलिस एक्शन में आ गई है रोड जाम है सरकारी संपत्ति को नुकसान हो रहा है किसानों के आड़ मे कही उपद्रवियों अपनी रोटियाँ तो नहीं सेक रहे है इसके लिए हरियाणा पुलिस ऐसे उपद्रवियों की पहचान कर रही है। जिन्होंने आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और पुलिस पर हमला किया। पुलिस अब ऐसे लोगों को पहचान कर उनके पासपोर्ट और वीजा रद्द कराने की तैयारी कर रही है इसमे किसान बनकर अलग देशों से लोग आए हुए है जिससे हरियाणा सरकार ने कड़ी कार्यवाही कर रही है वहीं किसान संगठनों की मांग है कि केंद्र सरकार एमएसपी गारंटी कानून बनाए। वहीं सरकार किसानों के साथ बातचीत से मामले का समाधान चाहती है। यही वजह है कि सरकार ने 4 बार वार्ता फेल होने के बाद भी 5वें दौर की वार्ता का न्योता किसानों को दिया है।


सरकार बातचीत करने को तैयार है 

केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने बुधवार को कहा कि सरकार प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अभी तक कोई बैठक तय नहीं हुई है उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान निकालने की जरूरत है ऐसे काम और खराब हो रहा है और किसानों को इसके बारे मे बातचीत करके इसका हल निकाला निकलेगा इसलिए बातचीत की जाएगी। संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी सहित अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए 'दिल्ली चलो' मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं और दिल्ली के सभी बॉर्डर बंद कर रखे है जिससे आम जनता को काफी आवाजाही मे काफी परेशानी हो रही है

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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

केले में लगे स्यूडोस्टेम वेविल कीट एवम् सर्दी के दुष्प्रभाव को कैसे करें प्रबंधित

क्या आप जानते हैं ? केले में लगे स्यूडोस्टेम वेविल कीट एवम् सर्दी के दुष्प्रभाव  को कैसे करें प्रबंधित

आइए जानते हैं प्रोफेसर (डॉ) एस.के.सिंह प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना एवम् सह निदेशक अनुसंधान से केले में लगे स्यूडोस्टेम वेविल कीट एवम् सर्दी के दुष्प्रभाव को कैसे करें प्रबंधित!



जून- जुलाई में   उत्तक संबर्धन से लगाया गया केला का पौधा 7-8 महीने का हो गया होगा , अब इसमे हल्की जुताई-गुड़ाई करने के बाद प्रति केला 200 ग्राम यूरिया, 200 ग्राम म्यूरेट आफ पोटाश एवं 100 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग करें  तथा मिट्टी चढ़ा दे , क्योकि अब इसमे फूल आने ही वाला है । ज्ञातव्य हो की बिहार में केला के लिए 300 ग्राम नत्रजन, 200 ग्राम फास्फोरस एवम् 300 ग्राम पोटाश तत्व के रूप प्रति पौधा देने की अनुसंशा किया जाता हैं एवम् सलाह दिया जाता है की उपरोक्त उर्वरकों की मात्रा को तीन या चार बराबर बराबर हिस्से मे बाट दिया जाय।जब चार स्प्लिट मे देना हो तो 0,3,6,9 वे महीने में यदि 3 स्प्लिट मे देना हो तो 0,4,8 महीने में ऊर्वरकों को देना चाहिए। सूखी एवं रोगग्रस्त पत्तियों को तेज चाकू से समय-समय पर काटते रहना चाहिए। येसा करने से रोग की सान्ध्रता भी घटती है एवं  रोग का फैलाव भी कम होता है। हवा एवं प्रकाश नीचे तक पहुचता रहता है, जिससे कीटों की संख्या में भी कमी आती  है। अधिकतम उपज के लिए स्वस्थ 13-15 पत्तियों ही पर्याप्त होती है। आवश्यकतानुसार हल्की- हल्की  सिचांई करे। यदि पत्तियों या पौधों में  किसी भी प्रकार का सूक्ष्म पोषक तत्वों  की कमी दिखाई दे तो अविलंब उस कमी को दूर करने के लिए उसका छिड़काव करें।उपरोक्त सभी उपाय आगामी केला की उपज को सीधे प्रभावित करेगा।के



ले स्यूडोस्टेम वेविल से आक्रांत केले के पौधे को  स्यूडोस्टेम को आधार से काटें और 100 मिलीलीटर बेवेरिया बेसियाना (3 मि.ली. / लीटर) या क्लोरपाइरीफोस (2.5 मि.ली. / लीटर) + स्टिकिंग एजेंट (1 मि.ली.) से उपचारित करें। इस कीट से बचाव के लिए क्लोरोपाइरीफोस (2.5 मिली / ली + 1 मिली स्टिकिंग एजेंट) या एजेडिरैचिन 1% (2.5 मि.ली. / ली।) 5 महीने पुराने केले के तने पर रगड़कर लगाया जा सकता है।   

बंच की कटाई के बाद, स्यूडोस्टेम को 30 सेमी लंबाई के टुकड़ों में काटा जा सकता है और कीट को संग्रह करने के लिए जाल के रूप में उपयोग किया जाता है।

इस कीट की उग्रता कम हो इसके लिए आवश्यक है की केला के बाग की निराई गुड़ाई  किया जाय एवम्  स्वच्छ खेती को बढ़ावा देने की आवश्यक है।

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शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

वैज्ञानिक तरीके से पपीते की खेती कर,अधिक उत्पादन करे

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं, जहां अलग अलग मौसम अलग अलग फशलो का उत्पादन होता हैं,उत्तर भारत में मार्च और अप्रैल के महीने में पपीते की खेती बड़े पैमाने पर की जाती हैं,तो आइए जानते हैं पपीते की खेती और ज्यादा उत्पादन करने की विशेष तरीका देश के जाने माने वरिष्ठ फल वैज्ञानिक डॉ संजय कुमार सिंह से डॉक्टर सिंह बताते हैं, किसी भी फसल का बीज अच्छे नर्सरी से प्राप्त करे, क्योंकि नर्सरी एक ऐसा स्थान है,जहां पौधे तैयार किए जाते हैं और जरूरत के हिसाब से दूसरे स्थान पर रोपे जाते हैं. ऐसे में नर्सरी क्षेत्र का चयन करते समय कई बातों पर ध्यान देना पड़ता है. खास कर नर्सरी में जलभराव नहीं होने देना चाहिए. सभी पौधों को मर्सरी के अंदर बराबर धूप मिलना चाहिए, ताकि उनकी वृद्धि होती रहे. साथ ही नर्सरी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति समय- समय पर करते रहना चाहिए. वहीं, पालतू और जंगली जानवरों को नर्सरी से दूर रखा जाना चाहिए



बीजों के चयन का रखें ध्यान:

डॉक्टर सिंह के मुताबिक, पपीते के उत्पादन के लिए नर्सरी में पौधों का उगाना बहुत महत्व रखता है. इसके लिए बीज की मात्रा एक हेक्टेयर के लिए 500 ग्राम पर्याप्त होती है. बीज पूर्ण पका हुआ होना चाहिए. साथ ही बीज अच्छी तरह सूखा हुआ हो. उसे शीशे की जार या बोतल में रखा चाहिए. खास बात ये भी है कि बीज 6 महीने से पुराना न हो. वहीं, बोने से पहले बीज को 3 ग्राम केप्टान से एक किलो बीज को उपचारित करना चाहिए.



बीज बोने के लिए क्यारी जमीन से ऊंची उठी होनी चाहिए. इसके अलावा बड़े गमले या लकड़ी के बक्सों का भी प्रयोग कर सकते हैं. इन्हें तैयार करने के लिए पत्ती की खाद, बालू और गोबर की खाद को बराबर मात्र में मिलाकर मिश्रण तैयार कर लेते हैं. जिस स्थान पर नर्सरी हो उस स्थान की अच्छी जुताई, गुड़ाई करके समस्त कंकड़-पत्थर और खरपतवार निकाल कर साफ़ कर देना चाहिए.


नर्सरी की मिट्टी कैसे तैयार करें: 


डॉक्टर सिंह बताते हैं कि पपीता की खेती के लिए यदि संभव हो तो प्लास्टिक टनल से ढकी जुताई वाली मिट्टी पर लगभग 4-5 सप्ताह तक मिट्टी का सोलराइजेशन करना बेहतर होता है. बुवाई के 15-20 दिन पहले मिट्टी को 4-5 लीटर पानी में 1.5-2% फॉर्मेलिन घोल कर प्रति वर्ग मीटर की मात्रा में मिलाकर प्लास्टिक शीट से ढक दें. कैप्टन और थीरम जैसे कवकनाशी @ 2 ग्राम /लीटर की दर से घोल बना कर मिट्टी के अंदर के रोगजनकों को भी मार देना चाहिए. फुराडॉन और हेप्टाक्लोर कुछ ऐसे कीटनाशक हैं, जिन्हें सूखी मिट्टी में 4-5 ग्राम/वर्ग मी की दर से मिलाया जाता है. वहीं, नर्सरी तैयार करने के लिए 15-20 सेंटीमीटर की गहराई तक मिलाया जाना चाहिए. ढकी हुई पॉलीथीन शीट के नीचे कम से कम 4 घंटे लगातार गर्म भाप की आपूर्ति करें और मिट्टी को बीज बिस्तर तैयार करते रहें.

दूरी का रखें ध्यान: डॉक्टर सिंह के मुताबिक, एक एकड़ के लिए 4050 वर्ग मीटर जमीन में उगाए गए पौधे काफी होते हैं. इसमें 2.5 x 10 x 0.5 मीटर आकार की क्यारी बनाकर उपरोक्त मिश्रण अच्छी तरह मिला दें और क्यारी को ऊपर से समतल कर दें. इसके बाद मिश्रण की तह लगाकर 1/2′ गहराई पर 3′ x 6′ के फासले पर पंक्ति बनाकर उपचारित बीज बो दें. फिर 1/2′ गोबर की खाद के मिश्रण से ढक कर लकड़ी से दबा दें, ताकि बीज ऊपर न रह जाए. यदि गमलों बक्सों या प्रोट्रे का उगाने के लिए प्रयोग करें तो इनमें भी इसी मिश्रण का प्रयोग करें. बोई गई क्यारियों को सूखी घास या पुआल से ढक दें और सुबह शाम फब्बारे द्वारा पानी दें. बोने के लगभग 15-20 दिन भीतर बीज अंकुरित हो जाते हैं. जब इन पौधों में 4-5 पत्तियां और ऊंचाई 25 सेमी. हो जाए तो दो महीने बाद मुख्य खेत में प्रतिरोपण करना चाहिए. प्रतिरोपण से पहले गमलों को धूप में रखना चाहिए.




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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

पराली जलाने पर विभागीय अधिकारियों ने कर्मचारियों को किया निलंबित।

मथुरा। उप कृषि निदेशक राम कुमार माथुर ने अवगत कराया है कि पराली की घटनाओं पर प्रभावी नियन्त्रण न करने के कारण कु० शालिनी जादौन, टी०ए०सी० एवं श्री राजेश कुमार, ग्राम विकास अधिकारी तथा रिठौरा के लेखपाल को निलम्बित किया गया है। साथ ही पराली जलाने वाले कृषकों को ऊपर रू 17500.00 का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है।


जनपद के किसान भाईयों से अपील की जाती है कि धान की पराली को खेतों में न जलायें बल्कि मृदा में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि हेतु पादप अवशेषों को मृदा में मिलावें / सडावें । पराली को जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि इसका मानव स्वास्थ पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह भी सूचित कराना है कि कुछ किसान भाई इस भ्रम में रहते हैं कि रात्रि में या सुबह 2-3 बजे पराली / फसल अवशेष में आग जलाने पर किसी को पता नहीं चलेगा इस विषय में अवगत कराना है कि पराली / फसल अवशेष जलाने की सूचना उपग्रह द्वारा 24 घण्टे रीयल टाइम फोटो सहित प्रेषित की जाती है, इसलिए कोई सम्भावना नहीं है कि पराली / फसल अवशेष जलाने की घटना को छुपाया जा सके। प्रत्येक घटना के सटीक अक्षान्तर देशान्तर उपग्रह इमेज के द्वारा जिला प्रशासन को कार्यवाही हेतु उसी दिन उपलब्ध करा दिये जाते हैं।

इसके अतिरिक्त यह सूचित करना है कि विभिन्न गौशाला संचालकों द्वारा स्वयं के संसाधनों से निराश्रित / बेसहारा गौवंश के चारे हेतु पराली का एकत्रीकरण भी किया जा रहा है। अतः आपसे अनुरोध है कि पराली को जलायें नहीं बल्कि अपने क्षेत्र की निकटतम गौशालाओं से सम्पर्क कर पराली का उठान करा दें।







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बिहार के बाजार में जल्द दिखेगा लाल केला! किसानों को होगी अच्छी आमदनी!

समस्तीपुर क्या आप लाल केला के बारे में जानते हैं, आइए प्रोफ़ेसर (डा.) एस. के. सिंह प्रधान अन्वेषक,अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (फल) एवम् सह निदेशक अनुसंधान डा.राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा, समस्तीपुर,बिहार से जानते हैं लाल केला के बारे में!


लाल केला दक्षिण भारत में बहुत ही लोकप्रिय है । जहां पीले केले 60-70 रुपये दर्जन बिकते है , वही लाल केला 100 रूपये से लेकर 150 रुपये दर्जन बिकता है । दक्षिण भारत में लोग इस केले के औषधीय एवं पोषक तत्वों से भलीभाति परिचित है । इसके विपरीत उत्तर भारत में अधिकांश लोग इस केले से अपरिचित है।इसी को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत , डॉ राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्विद्यालय में अनुसंधान प्रारंभ किया गया है ।इसका प्रमुख उदेश्य है की लाल केला को उत्तर भारत में भी लोकप्रिय बनाया जाय । इस सन्दर्भ में अनुसंधान कार्य प्रारंभ कर दिया गया है । इस केले को कब लगाया जाय , कितने दिन के बाद इसमे फूल एवं फल आयेंगे ,इसमे खाद एवं उर्वरकों की कितनी मात्रा देनी है , इसमे रोग एवं कीडों को कैसे प्रबंधित करेंगे ,इत्यादि विषयों पर शोध किया जा रहा है । शोध के निष्कर्ष से उत्तर भारत के किसानों को जल्द ही अवगत कराया जाएगा । 


दुनिया भर में केले की लगभग 1,000 से अधिक विभिन्न किस्में हैं। 

लाल केले लाल त्वचा के साथ दक्षिण पूर्व एशिया के केले का एक उपसमूह हैं। वे नरम होते हैं और पके होने पर एक मीठा स्वाद होता है। इसकी जेनेटिक संरचना AAA होती है । कुछ लोगों की मान्यता हैं कि लाल केला का भी स्वाद एक नियमित केले की तरह होता हैं, लेकिन इसका स्वाद एवं मिठास कुछ कुछ रास्पबेरी जैसा होता है । ये अक्सर पका कर उपयोग में किए जाते हैं, लेकिन स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ भी अच्छी तरह से मिलाया जा सकता हैं। लाल केले में कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली, हृदय स्वास्थ्य, और पाचन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते है । पीले केले की तरह लाल केले भी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।वे विशेष रूप से पोटेशियम, विटामिन सी और विटामिन बी 6 में समृद्ध हैं और इसमें उचित मात्रा में फाइबर होता है। एक अध्यन के अनुसार एक लगभग 100 ग्राम के लाल केला से लगभग 90 कैलोरी उर्जा , कार्बोहायड्रेट 21 ग्राम,प्रोटीन 1.3 ग्राम, वसा 0.3 ग्राम, फाइबर 3 ग्राम,पोटेशियम 9%, विटामिन B6 RDI का 28%; विटामिन सी आरडीआई का 9%;मैग्नीशियम RDI का 8% होता है । एक छोटे लाल केले में केवल लगभग 90 कैलोरी होती है और इसमें ज्यादातर पानी और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। विटामिन बी 6, मैग्नीशियम और विटामिन सी की उच्च मात्रा इस केले की किस्म को विशेष रूप से पोषक तत्वों से भरपूर बनाती है।

सभी केलों में खासकर लाल केला (रेड बनाना)में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है जिसकी वजह से रक्तचाप को नियंत्रित करने में इसकी भूमिका को कई गुना बढ़ा देता है । पोटेशियम हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक खनिज है। लाल केले पोटेशियम से भरपूर होते हैं , जिसमें एक छोटा फल 9% RDI प्रदान करता है। शोध से पता चलता है कि अधिक पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ खाने से रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है। रक्तचाप नियंत्रण के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण खनिज मैग्नीशियम है। एक छोटा लाल केला इस खनिज के लिए आपकी दैनिक जरूरतों का लगभग 8% प्रदान करता है। अध्ययनों की समीक्षा से पता चला है कि मैग्नीशियम का सेवन प्रति दिन 100 मिलीग्राम बढ़ाने से आपके उच्च रक्तचाप का खतरा 5% तक कम हो जाता है।इसके अतिरिक्त, मैग्नीशियम और पोटेशियम दोनों का सेवन बढ़ाना रक्तचाप को कम करने में केवल एक खनिज से अधिक खाने से अधिक प्रभावी हो सकता है।

लाल केले में कैरोटेनॉयड्स होते हैं , रंगद्रव्य जो फलों को लाल रंग का छिलका देते हैं। लाल केले में ल्यूटिन और बीटा कैरोटीन दो कैरोटीनॉयड होते हैं जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ल्यूटिन उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन (एएमडी), एक लाइलाज नेत्र रोग और अंधेपन का एक प्रमुख कारण को रोकने में मदद कर सकता है। अध्ययनों की एक समीक्षा में पाया गया कि ल्यूटिन युक्त खाद्य पदार्थ खाने से देर से उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन का खतरा 26% तक कम हो जाता है। बीटा कैरोटीन एक और कैरोटीनॉयड है जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है, और लाल केले अन्य केले की किस्मों की तुलना में अधिक पाया जाता हैं। बीटा कैरोटीन शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है , आंखों के स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिनों में से एक है ।

अधिकांश अन्य फलों और सब्जियों की तरह, लाल केले में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। वास्तव में, वे पीले केले की तुलना में कुछ एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा प्रदान करते हैं। एंटीऑक्सिडेंट यौगिक होते हैं जो मुक्त कण नामक अणुओं के कारण सेलुलर क्षति को रोकते हैं। आपके शरीर में अत्यधिक मुक्त कण ऑक्सीडेटिव तनाव के रूप में जाना जाने वाला असंतुलन पैदा कर सकते हैं, जो हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी स्थितियों से जुड़ा हुआ है। ये एंटीऑक्सिडेंट सुरक्षात्मक स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक व्यवस्थित समीक्षा में पाया गया कि एंथोसायनिन के आहार सेवन से कोरोनरी हृदय रोग का खतरा 9% कम हो गया। लाल केले जैसे एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर फल खाने से कुछ पुरानी स्थितियों का खतरा कम हो सकता है।

लाल केले विटामिन सी और बी6 से भी भरपूर होते हैं। स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए ये पोषक तत्व आवश्यक हैं। एक छोटा लाल केला क्रमशः 9% और 28% विटामिन सी और बी 6 के लिए आरडीआई प्रदान करता है। विटामिन सी आपके इम्यून सिस्टम की कोशिकाओं को मजबूत करके इम्युनिटी को बढ़ाता है। तदनुसार, कुछ शोध बताते हैं कि विटामिन सी की मामूली कमी भी संक्रमण के बढ़ते जोखिम से जुड़ी हो सकती है। लाल केले में मौजूद विटामिन बी6 भी आपके इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वास्तव में, विटामिन बी6 की कमी आपके शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को कम कर सकती है।








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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2022

जीवन में जितनी ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत है उतनी ही ज्यादा जरूरत एजुकेशन : बिहार का ट्रीबॉय कन्हैया

विभूतिपुर प्रखंड अंतर्गत ग्लोबल एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज लीडर, बिहार का ट्रीबॉय कन्हैया व आपका बुक बैंक सह निःशुल्क पाठशाला के संचालक गुरुजी कन्हैया सर जो पिछले दस महीनों से गरीबों, दलितों, असहायों और पिछड़े वर्गों के जाति के बच्चों को निःशुल्क पाठशाला खोलकर निःशुल्क शिक्षा देने का कार्य कर रहें हैं!


पाठशाला के शुरुवाती दौर में दस से पंद्रह बच्चें पढ़ने के लिए आते थे | समय बीतता गया और पाठशाला में बच्चों की बढ़ोतरी हुई | अभी वर्तमान में चालीस से पचास बच्चें निःशुल्क शिक्षा ले रहें हैं | बतातें चलें कि ट्रीबॉय कन्हैया निःशुल्क देने के साथ–साथ निःशुल्क पौधरोपण भी करवाते हैं | इनका कार्य अद्भुत और बहुत ही सराहनीय है | ट्रीबॉय भारत माता को पर्यावरण प्रदूषण रूपी समस्या से आज़ाद कराने के लिए किन्हीं का जन्मदिन, मुंडन, शादी या शादी के सालगिरह पर निःशुल्क पौधरोपण करवाते हैं | जिससे हमारा पर्यावरण संतुलित और सुरक्षित रहेगा | ट्रीबॉय कन्हैया सैकड़ों पौधरोपण कर चुके हैं |







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Gaya: 18 प्रखंडो के 136 पंचायतों के 1283 राजस्व गांव के किसानों को मिलेगा अनुदान

अनियमित एवं अल्पवर्षापात के कारण जिले में उत्पन्न सुखाड़ की स्थिति बनी। जिले के 18 प्रखंडो के 136 पंचायतों के 1283 राजस्व गांव के अंतर्गत आने वाले गांव टोलो में रहने वालों के परिवारों को 35 सौ रुपये अनुग्रहित राहत राशि बैंक खाते में सीधे स्थानांतरित होगा

इस वर्ष अनियमित एवं अल्पवर्षापात के कारण जिले में उत्पन्न सुखाड़ की स्थिति बनी। जिले के 18 प्रखंडो के 136 पंचायतों के 1283 राजस्व गांव के अंतर्गत आने वाले गांव, टोलो में रहने वालों के परिवारों को 35 सौ रुपये अनुग्रहित राहत राशि पीएफएमएस के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे स्थानांतरित किया जाना है। इसी परिप्रेक्ष्य में बुधवार की शाम को जिला पदाधिकारी डा. त्यागराजन एसएम ने वरीय पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, अंचलाधिकारी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की।

एक भी परिवार का नाम न छूटेः डीएम

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया की पोर्टल पर जितने भी परिवारों का नाम प्रविष्ट किया गया है, उनका सत्यापन अगले दो दिनों में कर लें। सत्यापन के दौरान एक भी परिवार का नाम न छूटे तथा गलत/अयोग्य नाम का प्रविष्टि नहीं होना चाहिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सर्वेक्षणकर्ता से सर्वेक्षण के उपरांत प्रमाण पत्र अवश्य लें। साथ ही शुक्रवार को पंचायत स्तर अनुश्रवण समिति की बैठक कराएंगे। 

दो दिन में भुगतान हेतु अग्रसारित करें

राजस्व गांव एवं वार्ड की संबद्धता संबंधी विहित प्रपत्र में प्रतिवेदन प्रभावित परिवादी की संख्या के साथ उपलब्ध कराए। अगले दो दिन में परिवारों की सूची भुगतान हेतु अग्रसारित कर दिया जाए।वीडियो कांफ्रेंसिंग में उप विकास आयुक्त, विशेष कार्य पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, वरीय उप समाहर्ता, डीपीओ आईसीडीएस आदि शामिल थे।








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शनिवार, 24 सितंबर 2022

PM Kisan: जल्द खत्म होगा किसानों का इंतजार, जल्द मिलेंगी 12वीं किस्त का पैसा

केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत दिसंबर 2019 से की थी. इस योजना के तहत केंद्र सरकार लघु व सीमांत किसानों को प्रत्येक साल 6 हजार रुपये देती है


प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना देश की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है. इस योजना से देश के लगभग 10 कराेड़ से अधिक किसान सीधे तौर पर लाभांवित हो रहे हैं,अभी तक केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय किसानों के खातों में पीएम किसान योजना के तहत 11 किस्त के पैसे जारी कर चुका है. इसके बाद से किसानों को 12वीं किस्त के पैसों का इंतजार है.जो अब बस खत्म होने ही वाला है. इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई है. जिसके तहत 12वीं किस्त जारी करने की सारी औपचारिकतां पूरी हो गई है, बस अब अंतिम मुहर लगाना बाकी है. जानकारी के मुताबिक इस समयावधि से पहले 12वीं किस्त का पैसा जारी कर दिया जाएगा!


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तंबर के आखिरी दिनों में जारी हो सकती है किस्त

जानकारी के मुताबिक कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय किसानों के खातों में जल्द से जल्द 12वीं किस्त का पैसा जमा कराना चाहता है. इसके लिए लगभग सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं. जिसके तहत मंत्रालय सितंबर आखिरी से अक्टूबर 20 तक 12वीं किस्त जारी करने की तैयारी कर रहा है. उम्मीद लगाई जा रही है कि सितंबर महीने के आखिरी दिनों में 12वीं किस्त जारी की जा सकती है


दीपावली तक किसानोंं के खातों में पैसे भेजने की तैयारी

असल में मंत्रालय की योजना दीपावली से पहले किसानों के खातों में 12वीं किस्त का पैसा भेजने का है. इसी उद्देश्य के साथ मंत्रालय काम कर रहा है. जानकारी के मुताबिक इसी कड़ी में पहली संभावित तारीख सितंबर महीने के आखिरी दिन है. हालांकि अभी पंजीकृत किसानों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है, जिसमें देरी होने की संभावना है. ऐसे में सरकार की तरफ से 20 अक्टूबर से पहले यानी दीपावली से पहले किसानों के खातों में पैसे भेजने की तैयारी की जा रही है. इस बार दीपावली 24 अक्टूबर को है.







किसानों के खातों में आते हैं दो हजार रुपये

केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत दिसंबर 2019 से की थी. इस योजना के तहत केंद्र सरकार लघु व सीमांत किसानों को प्रत्येक साल 6 हजार रुपये देती है. जो किसानों के खातों में 3 किस्त में भेजे जाते है. मसलन प्रत्येक साल किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली राशि किसानों के खातों में 4 महीने के अतंराल में भेजी जाती है. इसके तहत 4 महीने में जारी हाेने वाली एक किस्त के तौर पर किसानों के खातों में 2 हजार रुपये भेजे जाते हैं.

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रविवार, 28 अगस्त 2022

Samastipur : झमाझम वर्षा से किसानों को मिली राहत

समस्तीपुर :लंबे इंतजार के बाद शनिवार की देर रात क्षेत्र में झमाझम वर्षा हुई। वर्षा के बाद मानसून की बेरुखी के चलते परेशान किसानों ने राहत की सांस ली।वर्षा नहीं होने से पीले पड़ रहे धान के पौधों में फिर से जान आ गई। बारिश होने के बाद अब कृषि कार्य में तेजी आएगी।

पिछले कई दिनों से क्षेत्र में वर्षा नहीं होने के कारण किसान परेशान थे। वर्षा के मौसम में खेत सूखने लगे थे। बड़ी संख्या क्षेत्र में ऐसे किसान हैं, जिनके पास सिंचाई की सुविधा नहीं और उनके लिए कृषि कार्य पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर है। वर्षा नहीं होने से ऐसे किसानों की चिंता बढ़ गई थीं।
वर्षा नहीं होने के कारण खेत सूख गए थे और धान के पौधों में पीलापन आने लगा था। शुक्रवार- शनिवार को दिन भर तेज धूप रहने के बाद रात को अचानक ही मौसम में बदलाव देखने को मिला और अचानक ही झमाझम वर्षा शुरू हो गई और लगभग चार घंटे तक वर्षा होती रही। जिसके बाद भी शुबह में हल्की बूंदाबांदी जारी रही।

किसान ने बताया कि वर्षा से धान के पौधों को फायदा होगा, लेकिन वर्षा सबसे ज्यादा है। खेत पूरी तरह से सुख पड़े थे, वर्षा का पानी अभी खेतों में लबालब भरा हुआ है।

गर्मी व उमस से लोगों को मिली राहत

पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में आसमान साफ था और तेज धूप के चलते दिन के तापमान भी अधिक हो गया था। गर्मी व उमस से लोगों का बुरा हाल था। क्षेत्र में हुई वर्षा के बाद एक और किसानों ने राहत की सांस ली, तो दूसरी ओर आम लोगों को भी गर्मी व उमस से राहत मिली। वर्षा होने के बाद तापमान में कमी आई है।





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