गुरुवार, 2 जनवरी 2025

ग्लोबल मार्केट में बढ़ी भारतीय चावल की डिमांड, इंडोनेशिया खरीदेगा 10 लाख टन चावल।

Global Market: ग्लोबल मार्केट में कई सालों से भारतीय चावलों की मांग हमेशा बनी रहती है,विदेशी बाजारों से डिमांड बढ़ रही है,बांग्लादेश में चावल की जरूरत को पूरा करने के लिए भारत को 10 लाख टन चावल भेजने की मंजूरी मिल गई है। इंडोनेशिया ने अपनी चावल जरूरत को पूरा करने के लिए भारत सरकार से खरीदने की पेशकश की थी। बता दे कि भारत सरकार जुलाई 2023 में चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था

जिस कारण चावल ग्लोबल मार्केट में नहीं जा रहा था. लेकिन अक्टूबर 2024 में केंद्र ने विदेशी खरीदारों की मांगों की पूर्ती करने को मंजूरी दे दी है, और एमईपी भी हटा दिया गया हैं, केंद्र के इस फैसले के बाद से विदेशी खरीदारों की ओर से डिमांड बढ़ी है. नवंबर और दिसंबर 2024 में केंद्र ने बांग्लादेश को 50 लाख टन गैर बासमती चावल निर्यात करने की मंजूरी दी थी, अब बीते दिन इंडोनेशिया को चावल निर्यात की मंजूरी दी है।


इंडोनेशिया को 10 लाख टन चावल सप्लाई करेगा भारत

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने बुधवार को इंडोनेशिया की मांग अनुसार 10 लाख टन सफेद चावल की निर्यात को मंजूरी दे दी है, बता दे कि राष्ट्रीय सहकारी निर्यात (NCEL) के जरिए इंडोनेशिया को 10 लाख टन गैर बासमती सफेद चावल निर्यात किया जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंडोनेशिया सरकार की एजेंसी बुलोग की ओर से भारत की अधिसूचित एजेंसी एनसीईएल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.


निर्यात बैन से बढ़ी कीमतें

भारत चावल के मामले में सबसे बड़ा निर्यातक है और वैश्विक आपूर्ति में सर्वाधिक 40 फीसदी हिस्सेदारी है, दरअसल अक्टूबर में भारतीय चावल के निर्यात पर प्रतिबंध हटने के बाद यहां से भरपूर मात्रा में चावल विदेशी बाजारों में पहुंचने से अक्टूबर में वैश्विक स्तर पर कीमतों में 15 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई थी,हालांकि, नवंबर में वैश्विक बाजार में मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी।







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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

केले में लगे स्यूडोस्टेम वेविल कीट एवम् सर्दी के दुष्प्रभाव को कैसे करें प्रबंधित

क्या आप जानते हैं ? केले में लगे स्यूडोस्टेम वेविल कीट एवम् सर्दी के दुष्प्रभाव  को कैसे करें प्रबंधित

आइए जानते हैं प्रोफेसर (डॉ) एस.के.सिंह प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना एवम् सह निदेशक अनुसंधान से केले में लगे स्यूडोस्टेम वेविल कीट एवम् सर्दी के दुष्प्रभाव को कैसे करें प्रबंधित!



जून- जुलाई में   उत्तक संबर्धन से लगाया गया केला का पौधा 7-8 महीने का हो गया होगा , अब इसमे हल्की जुताई-गुड़ाई करने के बाद प्रति केला 200 ग्राम यूरिया, 200 ग्राम म्यूरेट आफ पोटाश एवं 100 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग करें  तथा मिट्टी चढ़ा दे , क्योकि अब इसमे फूल आने ही वाला है । ज्ञातव्य हो की बिहार में केला के लिए 300 ग्राम नत्रजन, 200 ग्राम फास्फोरस एवम् 300 ग्राम पोटाश तत्व के रूप प्रति पौधा देने की अनुसंशा किया जाता हैं एवम् सलाह दिया जाता है की उपरोक्त उर्वरकों की मात्रा को तीन या चार बराबर बराबर हिस्से मे बाट दिया जाय।जब चार स्प्लिट मे देना हो तो 0,3,6,9 वे महीने में यदि 3 स्प्लिट मे देना हो तो 0,4,8 महीने में ऊर्वरकों को देना चाहिए। सूखी एवं रोगग्रस्त पत्तियों को तेज चाकू से समय-समय पर काटते रहना चाहिए। येसा करने से रोग की सान्ध्रता भी घटती है एवं  रोग का फैलाव भी कम होता है। हवा एवं प्रकाश नीचे तक पहुचता रहता है, जिससे कीटों की संख्या में भी कमी आती  है। अधिकतम उपज के लिए स्वस्थ 13-15 पत्तियों ही पर्याप्त होती है। आवश्यकतानुसार हल्की- हल्की  सिचांई करे। यदि पत्तियों या पौधों में  किसी भी प्रकार का सूक्ष्म पोषक तत्वों  की कमी दिखाई दे तो अविलंब उस कमी को दूर करने के लिए उसका छिड़काव करें।उपरोक्त सभी उपाय आगामी केला की उपज को सीधे प्रभावित करेगा।के



ले स्यूडोस्टेम वेविल से आक्रांत केले के पौधे को  स्यूडोस्टेम को आधार से काटें और 100 मिलीलीटर बेवेरिया बेसियाना (3 मि.ली. / लीटर) या क्लोरपाइरीफोस (2.5 मि.ली. / लीटर) + स्टिकिंग एजेंट (1 मि.ली.) से उपचारित करें। इस कीट से बचाव के लिए क्लोरोपाइरीफोस (2.5 मिली / ली + 1 मिली स्टिकिंग एजेंट) या एजेडिरैचिन 1% (2.5 मि.ली. / ली।) 5 महीने पुराने केले के तने पर रगड़कर लगाया जा सकता है।   

बंच की कटाई के बाद, स्यूडोस्टेम को 30 सेमी लंबाई के टुकड़ों में काटा जा सकता है और कीट को संग्रह करने के लिए जाल के रूप में उपयोग किया जाता है।

इस कीट की उग्रता कम हो इसके लिए आवश्यक है की केला के बाग की निराई गुड़ाई  किया जाय एवम्  स्वच्छ खेती को बढ़ावा देने की आवश्यक है।

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शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

वैज्ञानिक तरीके से पपीते की खेती कर,अधिक उत्पादन करे

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं, जहां अलग अलग मौसम अलग अलग फशलो का उत्पादन होता हैं,उत्तर भारत में मार्च और अप्रैल के महीने में पपीते की खेती बड़े पैमाने पर की जाती हैं,तो आइए जानते हैं पपीते की खेती और ज्यादा उत्पादन करने की विशेष तरीका देश के जाने माने वरिष्ठ फल वैज्ञानिक डॉ संजय कुमार सिंह से डॉक्टर सिंह बताते हैं, किसी भी फसल का बीज अच्छे नर्सरी से प्राप्त करे, क्योंकि नर्सरी एक ऐसा स्थान है,जहां पौधे तैयार किए जाते हैं और जरूरत के हिसाब से दूसरे स्थान पर रोपे जाते हैं. ऐसे में नर्सरी क्षेत्र का चयन करते समय कई बातों पर ध्यान देना पड़ता है. खास कर नर्सरी में जलभराव नहीं होने देना चाहिए. सभी पौधों को मर्सरी के अंदर बराबर धूप मिलना चाहिए, ताकि उनकी वृद्धि होती रहे. साथ ही नर्सरी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति समय- समय पर करते रहना चाहिए. वहीं, पालतू और जंगली जानवरों को नर्सरी से दूर रखा जाना चाहिए



बीजों के चयन का रखें ध्यान:

डॉक्टर सिंह के मुताबिक, पपीते के उत्पादन के लिए नर्सरी में पौधों का उगाना बहुत महत्व रखता है. इसके लिए बीज की मात्रा एक हेक्टेयर के लिए 500 ग्राम पर्याप्त होती है. बीज पूर्ण पका हुआ होना चाहिए. साथ ही बीज अच्छी तरह सूखा हुआ हो. उसे शीशे की जार या बोतल में रखा चाहिए. खास बात ये भी है कि बीज 6 महीने से पुराना न हो. वहीं, बोने से पहले बीज को 3 ग्राम केप्टान से एक किलो बीज को उपचारित करना चाहिए.



बीज बोने के लिए क्यारी जमीन से ऊंची उठी होनी चाहिए. इसके अलावा बड़े गमले या लकड़ी के बक्सों का भी प्रयोग कर सकते हैं. इन्हें तैयार करने के लिए पत्ती की खाद, बालू और गोबर की खाद को बराबर मात्र में मिलाकर मिश्रण तैयार कर लेते हैं. जिस स्थान पर नर्सरी हो उस स्थान की अच्छी जुताई, गुड़ाई करके समस्त कंकड़-पत्थर और खरपतवार निकाल कर साफ़ कर देना चाहिए.


नर्सरी की मिट्टी कैसे तैयार करें: 


डॉक्टर सिंह बताते हैं कि पपीता की खेती के लिए यदि संभव हो तो प्लास्टिक टनल से ढकी जुताई वाली मिट्टी पर लगभग 4-5 सप्ताह तक मिट्टी का सोलराइजेशन करना बेहतर होता है. बुवाई के 15-20 दिन पहले मिट्टी को 4-5 लीटर पानी में 1.5-2% फॉर्मेलिन घोल कर प्रति वर्ग मीटर की मात्रा में मिलाकर प्लास्टिक शीट से ढक दें. कैप्टन और थीरम जैसे कवकनाशी @ 2 ग्राम /लीटर की दर से घोल बना कर मिट्टी के अंदर के रोगजनकों को भी मार देना चाहिए. फुराडॉन और हेप्टाक्लोर कुछ ऐसे कीटनाशक हैं, जिन्हें सूखी मिट्टी में 4-5 ग्राम/वर्ग मी की दर से मिलाया जाता है. वहीं, नर्सरी तैयार करने के लिए 15-20 सेंटीमीटर की गहराई तक मिलाया जाना चाहिए. ढकी हुई पॉलीथीन शीट के नीचे कम से कम 4 घंटे लगातार गर्म भाप की आपूर्ति करें और मिट्टी को बीज बिस्तर तैयार करते रहें.

दूरी का रखें ध्यान: डॉक्टर सिंह के मुताबिक, एक एकड़ के लिए 4050 वर्ग मीटर जमीन में उगाए गए पौधे काफी होते हैं. इसमें 2.5 x 10 x 0.5 मीटर आकार की क्यारी बनाकर उपरोक्त मिश्रण अच्छी तरह मिला दें और क्यारी को ऊपर से समतल कर दें. इसके बाद मिश्रण की तह लगाकर 1/2′ गहराई पर 3′ x 6′ के फासले पर पंक्ति बनाकर उपचारित बीज बो दें. फिर 1/2′ गोबर की खाद के मिश्रण से ढक कर लकड़ी से दबा दें, ताकि बीज ऊपर न रह जाए. यदि गमलों बक्सों या प्रोट्रे का उगाने के लिए प्रयोग करें तो इनमें भी इसी मिश्रण का प्रयोग करें. बोई गई क्यारियों को सूखी घास या पुआल से ढक दें और सुबह शाम फब्बारे द्वारा पानी दें. बोने के लगभग 15-20 दिन भीतर बीज अंकुरित हो जाते हैं. जब इन पौधों में 4-5 पत्तियां और ऊंचाई 25 सेमी. हो जाए तो दो महीने बाद मुख्य खेत में प्रतिरोपण करना चाहिए. प्रतिरोपण से पहले गमलों को धूप में रखना चाहिए.




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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

पराली जलाने पर विभागीय अधिकारियों ने कर्मचारियों को किया निलंबित।

मथुरा। उप कृषि निदेशक राम कुमार माथुर ने अवगत कराया है कि पराली की घटनाओं पर प्रभावी नियन्त्रण न करने के कारण कु० शालिनी जादौन, टी०ए०सी० एवं श्री राजेश कुमार, ग्राम विकास अधिकारी तथा रिठौरा के लेखपाल को निलम्बित किया गया है। साथ ही पराली जलाने वाले कृषकों को ऊपर रू 17500.00 का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है।


जनपद के किसान भाईयों से अपील की जाती है कि धान की पराली को खेतों में न जलायें बल्कि मृदा में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि हेतु पादप अवशेषों को मृदा में मिलावें / सडावें । पराली को जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि इसका मानव स्वास्थ पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह भी सूचित कराना है कि कुछ किसान भाई इस भ्रम में रहते हैं कि रात्रि में या सुबह 2-3 बजे पराली / फसल अवशेष में आग जलाने पर किसी को पता नहीं चलेगा इस विषय में अवगत कराना है कि पराली / फसल अवशेष जलाने की सूचना उपग्रह द्वारा 24 घण्टे रीयल टाइम फोटो सहित प्रेषित की जाती है, इसलिए कोई सम्भावना नहीं है कि पराली / फसल अवशेष जलाने की घटना को छुपाया जा सके। प्रत्येक घटना के सटीक अक्षान्तर देशान्तर उपग्रह इमेज के द्वारा जिला प्रशासन को कार्यवाही हेतु उसी दिन उपलब्ध करा दिये जाते हैं।

इसके अतिरिक्त यह सूचित करना है कि विभिन्न गौशाला संचालकों द्वारा स्वयं के संसाधनों से निराश्रित / बेसहारा गौवंश के चारे हेतु पराली का एकत्रीकरण भी किया जा रहा है। अतः आपसे अनुरोध है कि पराली को जलायें नहीं बल्कि अपने क्षेत्र की निकटतम गौशालाओं से सम्पर्क कर पराली का उठान करा दें।







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बिहार के बाजार में जल्द दिखेगा लाल केला! किसानों को होगी अच्छी आमदनी!

समस्तीपुर क्या आप लाल केला के बारे में जानते हैं, आइए प्रोफ़ेसर (डा.) एस. के. सिंह प्रधान अन्वेषक,अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (फल) एवम् सह निदेशक अनुसंधान डा.राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा, समस्तीपुर,बिहार से जानते हैं लाल केला के बारे में!


लाल केला दक्षिण भारत में बहुत ही लोकप्रिय है । जहां पीले केले 60-70 रुपये दर्जन बिकते है , वही लाल केला 100 रूपये से लेकर 150 रुपये दर्जन बिकता है । दक्षिण भारत में लोग इस केले के औषधीय एवं पोषक तत्वों से भलीभाति परिचित है । इसके विपरीत उत्तर भारत में अधिकांश लोग इस केले से अपरिचित है।इसी को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत , डॉ राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्विद्यालय में अनुसंधान प्रारंभ किया गया है ।इसका प्रमुख उदेश्य है की लाल केला को उत्तर भारत में भी लोकप्रिय बनाया जाय । इस सन्दर्भ में अनुसंधान कार्य प्रारंभ कर दिया गया है । इस केले को कब लगाया जाय , कितने दिन के बाद इसमे फूल एवं फल आयेंगे ,इसमे खाद एवं उर्वरकों की कितनी मात्रा देनी है , इसमे रोग एवं कीडों को कैसे प्रबंधित करेंगे ,इत्यादि विषयों पर शोध किया जा रहा है । शोध के निष्कर्ष से उत्तर भारत के किसानों को जल्द ही अवगत कराया जाएगा । 


दुनिया भर में केले की लगभग 1,000 से अधिक विभिन्न किस्में हैं। 

लाल केले लाल त्वचा के साथ दक्षिण पूर्व एशिया के केले का एक उपसमूह हैं। वे नरम होते हैं और पके होने पर एक मीठा स्वाद होता है। इसकी जेनेटिक संरचना AAA होती है । कुछ लोगों की मान्यता हैं कि लाल केला का भी स्वाद एक नियमित केले की तरह होता हैं, लेकिन इसका स्वाद एवं मिठास कुछ कुछ रास्पबेरी जैसा होता है । ये अक्सर पका कर उपयोग में किए जाते हैं, लेकिन स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ भी अच्छी तरह से मिलाया जा सकता हैं। लाल केले में कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली, हृदय स्वास्थ्य, और पाचन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते है । पीले केले की तरह लाल केले भी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।वे विशेष रूप से पोटेशियम, विटामिन सी और विटामिन बी 6 में समृद्ध हैं और इसमें उचित मात्रा में फाइबर होता है। एक अध्यन के अनुसार एक लगभग 100 ग्राम के लाल केला से लगभग 90 कैलोरी उर्जा , कार्बोहायड्रेट 21 ग्राम,प्रोटीन 1.3 ग्राम, वसा 0.3 ग्राम, फाइबर 3 ग्राम,पोटेशियम 9%, विटामिन B6 RDI का 28%; विटामिन सी आरडीआई का 9%;मैग्नीशियम RDI का 8% होता है । एक छोटे लाल केले में केवल लगभग 90 कैलोरी होती है और इसमें ज्यादातर पानी और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। विटामिन बी 6, मैग्नीशियम और विटामिन सी की उच्च मात्रा इस केले की किस्म को विशेष रूप से पोषक तत्वों से भरपूर बनाती है।

सभी केलों में खासकर लाल केला (रेड बनाना)में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है जिसकी वजह से रक्तचाप को नियंत्रित करने में इसकी भूमिका को कई गुना बढ़ा देता है । पोटेशियम हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक खनिज है। लाल केले पोटेशियम से भरपूर होते हैं , जिसमें एक छोटा फल 9% RDI प्रदान करता है। शोध से पता चलता है कि अधिक पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ खाने से रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है। रक्तचाप नियंत्रण के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण खनिज मैग्नीशियम है। एक छोटा लाल केला इस खनिज के लिए आपकी दैनिक जरूरतों का लगभग 8% प्रदान करता है। अध्ययनों की समीक्षा से पता चला है कि मैग्नीशियम का सेवन प्रति दिन 100 मिलीग्राम बढ़ाने से आपके उच्च रक्तचाप का खतरा 5% तक कम हो जाता है।इसके अतिरिक्त, मैग्नीशियम और पोटेशियम दोनों का सेवन बढ़ाना रक्तचाप को कम करने में केवल एक खनिज से अधिक खाने से अधिक प्रभावी हो सकता है।

लाल केले में कैरोटेनॉयड्स होते हैं , रंगद्रव्य जो फलों को लाल रंग का छिलका देते हैं। लाल केले में ल्यूटिन और बीटा कैरोटीन दो कैरोटीनॉयड होते हैं जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ल्यूटिन उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन (एएमडी), एक लाइलाज नेत्र रोग और अंधेपन का एक प्रमुख कारण को रोकने में मदद कर सकता है। अध्ययनों की एक समीक्षा में पाया गया कि ल्यूटिन युक्त खाद्य पदार्थ खाने से देर से उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन का खतरा 26% तक कम हो जाता है। बीटा कैरोटीन एक और कैरोटीनॉयड है जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है, और लाल केले अन्य केले की किस्मों की तुलना में अधिक पाया जाता हैं। बीटा कैरोटीन शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है , आंखों के स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिनों में से एक है ।

अधिकांश अन्य फलों और सब्जियों की तरह, लाल केले में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। वास्तव में, वे पीले केले की तुलना में कुछ एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा प्रदान करते हैं। एंटीऑक्सिडेंट यौगिक होते हैं जो मुक्त कण नामक अणुओं के कारण सेलुलर क्षति को रोकते हैं। आपके शरीर में अत्यधिक मुक्त कण ऑक्सीडेटिव तनाव के रूप में जाना जाने वाला असंतुलन पैदा कर सकते हैं, जो हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी स्थितियों से जुड़ा हुआ है। ये एंटीऑक्सिडेंट सुरक्षात्मक स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक व्यवस्थित समीक्षा में पाया गया कि एंथोसायनिन के आहार सेवन से कोरोनरी हृदय रोग का खतरा 9% कम हो गया। लाल केले जैसे एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर फल खाने से कुछ पुरानी स्थितियों का खतरा कम हो सकता है।

लाल केले विटामिन सी और बी6 से भी भरपूर होते हैं। स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए ये पोषक तत्व आवश्यक हैं। एक छोटा लाल केला क्रमशः 9% और 28% विटामिन सी और बी 6 के लिए आरडीआई प्रदान करता है। विटामिन सी आपके इम्यून सिस्टम की कोशिकाओं को मजबूत करके इम्युनिटी को बढ़ाता है। तदनुसार, कुछ शोध बताते हैं कि विटामिन सी की मामूली कमी भी संक्रमण के बढ़ते जोखिम से जुड़ी हो सकती है। लाल केले में मौजूद विटामिन बी6 भी आपके इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वास्तव में, विटामिन बी6 की कमी आपके शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को कम कर सकती है।








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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2022

Gaya: 18 प्रखंडो के 136 पंचायतों के 1283 राजस्व गांव के किसानों को मिलेगा अनुदान

अनियमित एवं अल्पवर्षापात के कारण जिले में उत्पन्न सुखाड़ की स्थिति बनी। जिले के 18 प्रखंडो के 136 पंचायतों के 1283 राजस्व गांव के अंतर्गत आने वाले गांव टोलो में रहने वालों के परिवारों को 35 सौ रुपये अनुग्रहित राहत राशि बैंक खाते में सीधे स्थानांतरित होगा

इस वर्ष अनियमित एवं अल्पवर्षापात के कारण जिले में उत्पन्न सुखाड़ की स्थिति बनी। जिले के 18 प्रखंडो के 136 पंचायतों के 1283 राजस्व गांव के अंतर्गत आने वाले गांव, टोलो में रहने वालों के परिवारों को 35 सौ रुपये अनुग्रहित राहत राशि पीएफएमएस के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे स्थानांतरित किया जाना है। इसी परिप्रेक्ष्य में बुधवार की शाम को जिला पदाधिकारी डा. त्यागराजन एसएम ने वरीय पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, अंचलाधिकारी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की।

एक भी परिवार का नाम न छूटेः डीएम

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया की पोर्टल पर जितने भी परिवारों का नाम प्रविष्ट किया गया है, उनका सत्यापन अगले दो दिनों में कर लें। सत्यापन के दौरान एक भी परिवार का नाम न छूटे तथा गलत/अयोग्य नाम का प्रविष्टि नहीं होना चाहिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सर्वेक्षणकर्ता से सर्वेक्षण के उपरांत प्रमाण पत्र अवश्य लें। साथ ही शुक्रवार को पंचायत स्तर अनुश्रवण समिति की बैठक कराएंगे। 

दो दिन में भुगतान हेतु अग्रसारित करें

राजस्व गांव एवं वार्ड की संबद्धता संबंधी विहित प्रपत्र में प्रतिवेदन प्रभावित परिवादी की संख्या के साथ उपलब्ध कराए। अगले दो दिन में परिवारों की सूची भुगतान हेतु अग्रसारित कर दिया जाए।वीडियो कांफ्रेंसिंग में उप विकास आयुक्त, विशेष कार्य पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, वरीय उप समाहर्ता, डीपीओ आईसीडीएस आदि शामिल थे।








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शुक्रवार, 12 अगस्त 2022

Bihar का ट्रीबॉय कन्हैया ने रक्षाबंधन पर दिया हरित उपहार!

समस्तीपुर जिलांतर्गत विभूतिपुर प्रखंड के विभूतिपुर पूरव निवासी पर्यावरण संरक्षक व संवर्धक ग्लोबल एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज लीडर बिहार का ट्रीबॉय कन्हैया भाई–बहन के अटूट विश्वास व अमूल्य प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर


बहन के लिए कृत्रिम उपहार के बजाय भारत माता को पर्यावरण प्रदूषण रूपी समस्या से आजाद कराने के लिए अपनी बहन के शुद्ध प्राणवायु के लिए उपहार के रूप में एक मल्लिका आम का पौधा भेंट कर हरित बधाई और शुभकामनाएं दिया | जिससे बहन जब–जब इस पौधे से फल, छाया और ऑक्सीजन ग्रहण करेगी तब अपने भाई कन्हैया को याद करती रहेगी | इसी दौरान बहन की उज्ज्वल भविष्य की हरित कामना किया | साथ ही ट्रीबॉय कन्हैया ने कहा कि जिस तरह से ये पेड़ हरा–भरा रहे उसी तरह तुम्हारा जीवन हरा–भरा रहे , खूब तरक्की करो और जिस मेहनत, लगन और उम्मीद से अपनी पढ़ाई कर रही हो प्रकृतिदेव जल्द पूर्ण करें | बतातें चलें कि ट्रीबॉय कन्हैया किन्हीं का जन्मदिन, मुंडन, शादी या शादी का सालगिरह या किसी हर्षोल्लास के अवसर पर अभी तक सैकड़ों पौधरोपण कर चुके हैं !








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बुधवार, 27 जुलाई 2022

​​ICAR AIEEA 2022: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्रवेश परीक्षा 2022 के लिए रजिस्ट्रेशन सुरु, कैसे करे आवेदन देखे पूरी जानकारी!

ICARR 2022: एनटीए ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्रवेश परीक्षा-2022 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सुरु कर दिए है, इसके लिए इच्छुक उम्मीदवार यहां दिए गए स्टेप्स के द्वारा आवेदन कर सकते हैं,

ICAR AIEEA 2022 Application Form: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्रवेश परीक्षा 2022 (ICAR AIEEA) के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इच्छुक व पात्र उम्मीदवार आईसीएआर की आधिकारिक साइट icar.nta.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 19 अगस्त 2022 है. जबकि एनटीए 21 से 23 अगस्त तक ऑनलाइन मोड में यूजी, पीजी पाठ्यक्रमों के लिए आईसीएआर एआईईईए 2022 आवेदन सुधार विंडो की सुविधा प्रदान करेगा. अधिसूचना के मुताबिक परीक्षा का आयोजन ऑनलाइन मोड में होगा. प्रवेश परीक्षा की भाषा AIEEA (UG) के लिए अंग्रेजी और हिंदी होगी. वहीं, AIEEA (PG) और AICE JRF/SRF (Ph.D) के लिए पेपर की भाषा अंग्रेजी होगी,


ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की आखिरी तारीख: 19 अगस्त 2022.

क्रेडिट/डेबिट कार्ड/नेट बैंकिंग/यूपीआई के माध्यम से शुल्क के सफल लेनदेन की अंतिम तारीख: 19 अगस्त 2022.

आवेदन पत्र के विवरण में सुधार: 21 अगस्त से 23 अगस्त 2022.

इस प्रकार करें आवेदन


चरण 1: सबसे पहले आधिकारिक साइट icar.nta.nic.in पर जाएं.

चरण 2: अब अपने पाठ्यक्रम के आधार पर होम पेज पर उपलब्ध पंजीकरण लिंक पर क्लिक करें.

चरण 3: इसके बाद अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज के लिए रजिस्ट्रेशन फॉर आईसीएआर एआईईईए (यूजी) - 2022 लिंक पर क्लिक करें.

चरण 4: अब आवश्यक विवरण भरकर अपना पंजीकरण करें.

चरण 5: इसके बाद फिर से लॉग इन करें.

चरण 6: अब आवेदन पत्र भरें.

चरण 7: इसके बाद दस्तावेज अपलोड करें.

चरण 8: अब आवेदन शुल्क का भुगतान करें और फॉर्म जमा करें.

चरण 9: अंत में फॉर्म डाउनलोड कर इसका प्रिंट आउट निकाल लें!




 




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