बुधवार, 5 अगस्त 2026

यूपी में बनेंगे दो डीप-टेक हब, लखनऊ और नोएडा से AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी व सेमीकंडक्टर सेक्टर को मिलेगी नई उड़ान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने लखनऊ और नोएडा में दो यू-हब (Deep Tech Hub) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन हब का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और अन्य अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान, स्टार्टअप और उद्योगों को बढ़ावा देना है।


सरकार इस परियोजना पर अगले तीन वर्षों में करीब 387.5 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है, जिसमें 70 करोड़ रुपये पूंजीगत और 30 करोड़ रुपये परिचालन खर्च के लिए निर्धारित हैं।


पहले चरण में 25-25 हजार वर्ग फुट का विकास

परियोजना के पहले चरण में लखनऊ और नोएडा में 25-25 हजार वर्ग फुट क्षेत्र विकसित किया जाएगा। यहां स्टार्टअप्स के लिए साझा कार्यस्थल (Co-working Space), प्रोटोटाइप विकसित करने की सुविधाएं और निवेशकों के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे।


दीर्घकालीन योजना के तहत नोएडा में 4 लाख वर्ग फुट और लखनऊ में 2 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में स्थायी डीप-टेक परिसर विकसित किए जाएंगे।


कंपनी अधिनियम के तहत होगा संचालन


यू-हब को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत स्थापित किया जाएगा। इसका संचालन 11 सदस्यीय निदेशक मंडल करेगा, जिसकी अध्यक्षता आईआईटी कानपुर के निदेशक करेंगे। दोनों केंद्रों के संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति भी की जाएगी।


दोनों हब की अलग-अलग होगी विशेषज्ञता


नोएडा डीप-टेक हब में क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, ओएसएटी (OSAT), फिजिकल AI, रोबोटिक्स, रक्षा तकनीक और उन्नत जैव प्रौद्योगिकी पर विशेष फोकस रहेगा।


वहीं लखनऊ डीप-टेक हब एप्लीकेशन आधारित AI, गवटेक, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल AI, कृषि जैव प्रौद्योगिकी और डायग्नोस्टिक्स से जुड़े स्टार्टअप्स एवं अनुसंधान को बढ़ावा देगा।


स्टार्टअप्स और रोजगार को मिलेगा लाभ


यू-हब का मुख्य उद्देश्य शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों को व्यावसायिक उत्पादों में बदलना है। इसके लिए स्टार्टअप्स, उद्योग, शोध संस्थानों, निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निवेश आकर्षित होगा और प्रदेश में डीप-टेक स्टार्टअप्स की सफलता दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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