शनिवार, 30 मार्च 2024

मुख्तार अंसारी गाजीपुर ले जाया जा रहा मुख्तार का शव, कल होगा सुपुर्द-ए-खाक

डॉन मुख्तार अंसारी के अंतिम संस्कार के लिए उसके पैतृक घर मुहम्मदाबाद के पास स्थित कब्रिस्तान में कब्र खोदी गई है. मुख्तार की कब्र उसके अम्मी-अब्बू के पास खोदी गई है. मुख्तार की कब्र की लंबाई 7 फीट रखी गई है 



जिसमे अंसारी साहब को दफनाया जायेगा मुख्तार के पैतृक कस्बे मोहम्मदाबाद में दुकानें बंद जिसने सुना उसको यकीन नहीं हो रहा था की अंसारी साहब अब नहीं रहे जिससे पूरे शहर मे सन्नाटा पसर गया मुख्तार अंसारी के शव को शुक्रवार को बांदा मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों के एक समूह द्वारा पोस्टमार्टम किये जाने के बाद गाजीपुर जिले के मोहम्‍दाबाद यूसुफपुर स्थित उसके पैतृक निवास ले जाया जाएगा. अंसारी के शव को दफनाने के लिए काली बाग स्थित पारिवारिक कब्रिस्तान में गड्ढा खोदा गया है और अंतिम संस्कार का समय शव को यहां लाये जाने के बाद तय किया जाएगा. इस बीच गाजीपुर और मऊ समेत आसपास के जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. अंसारी के शव को काली बाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा जो अंसारी परिवार के आवास से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित है। सूत्रों ने बताया कि इसी कब्रिस्तान में मुख्तार के मां-पिता की कब्र हैं। उन्होंने बताया कि मुख्तार के शव को देर शाम तक यहां लाये जाने की संभावना है. अंसारी परिवार के आवास से कब्रिस्तान तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है और लोगों मे आक्रोश है की कैसे अंसारी साहब मरहूम हो गए और कुछ लोग जाँच की मांग भी कर रहे है एडीजे अमिताभ यश ने कहा- पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट कर दिया गया है

एडीजे लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने कहा, ‘आज ‘जुम्मे की नमाज’ और कल बांदा जेल में हुई घटना को देखते हुए पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट कर दिया गया है. कई जिलों में अतिरिक्त बल भेजे गए हैं. सभी को शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है. पूरे राज्य में शांति है. कुछ जगहों पर अभी भी नमाज चल रही है, इसलिए सतर्कता बरती जा रही है. कहीं कोई समस्या नहीं है. और लोगों को भरोशा दिलवाया है की मुख्तार अंसारी की मौत की होगी न्यायिक जांच

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की मौत की न्यायिक जांच होगी. बांदा के जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं. एक महीने में जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गरिमा जांच करेंगी और जो सच है वो सबके सामने आ जायेगा

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शुक्रवार, 29 मार्च 2024

मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की दुश्मनी के किस्से,गोलियों की बौछार के बीच से बच निकला था मुख्तार अंसारी

मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की दुश्मनी के किस्से पूर्वांचल में उस वक्त शुरू हुए, जब दोनों जुर्म की दुनिया के बेताज बादशाह बनने में जुटे थे सरकारी ठेकों को हासिल करने के लिए एक बार भनायक दास्तान अभी भी लोगों के जहन मे है जिसमे की धुआँ धाड़ गोलियाँ से बच निकले थे 


अंसारी साहब आज भी उस सीन को देख कर लोगों के रूह कांप जाती है तारीख थी 15 जुलाई सन 2001 तूफानी बारिश के बाद भयंकर उमस-भरा दिन यूपी में मिनी असेंबली कहे जाने वाले पंचायत चुनाव की गहमागहमी थी। बड़े-बड़े बाहुबली अपने जिगर के छल्लों के सिर जीत का मुकुट देखना चाहते थे। हर कोई जानता था, यहां चुनाव बैलेट से ज्यादा बंदूक के जोर का था। गट्टे और कट्टे के बल पर चुनावी पट्टा लिखवाया जाता था। एक तरफ मंझले कद के बृजेश सिंह की अदावत कोई नहीं लेना चाहता था... दूसरी तरफ रौबदार मूंछ वाले और लगभग साढ़े छह फीट लंबे मुख्तार अंसारी का खौफ, जो जुर्म की दुनिया में उभरता सितारा था। बात गाजीपुर के मोहम्मदाबाद की है, जहां वो कांड हुआ, जिसका मुख्तार अंसारी को अंदाजा तक नहीं था की उनको ये दिन हमेशा के लिये याद रहने बाला है गाजीपुर जिले में मोहम्मदाबाद से करीब 7 किलोमीटर दूर उसरी चट्टी गांव में चुनाव प्रचार के लिए गाड़ियों का एक काफिला निकला। ये काफिला रेलवे फाटक पार कर गांव की तरफ बढ़ा ही था कि तभी काफिले की नाक के आगे एक ट्रक आकर खड़ा हो गया। जब तक कोई कुछ समझ पाता, और मुख्तार के शूटर बंदूक की नाल गाड़ियों से बाहर निकाल पाते, तब तक अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। ये पहला मौका था, जब मुख्तार अंसारी के ऊपर सामने से किसी ने हमला करने की जुर्रत की 

ट्रक में लोग लदकर आए थे। कहा जाता है कि ये सभी बृजेश सिंह के छर्रे थे। गाड़ी के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर हुई। गाड़ी में कुख्यात गैंगस्टर और मऊ सीट से विधायक मुख्तार अंसारी बैठा था और इस हमले का आरोप दूसरे गैंगस्टर बृजेश सिंह के ऊपर लगा। हमले में मुख्तार अंसारी बच गया लेकिन इलाके में उसके साथ बृजेश सिंह की दुश्मनी के चर्चे होने लगे। मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की दुश्मनी दशकों पुरानी थी और दोनों का कई बार आमना-सामना भी हुआ। आइए जानते हैं कि इन दोनों के बीच की ये अदावत कैसे शुरू हुई इसके बारी मे वो ही जनता है जिसने ये मंजर अपनी आँखो से देखा हो 

चलो जानते है की कैसे शुरू हुई बृजेश और मुख्तार की दुश्मनी 1980 के दशक में कुछ दबंगों से अपने पिता की हत्या का बदला लेने के बाद जब बृजेश सिंह पहली बार जेल गया, तो उसकी मुलाकात त्रिभुवन सिंह से हुई। त्रिभुवन सिंह उस वक्त लोहे के स्क्रैप और बालू रेत की अवैध ठेकेदारी करने वाले साहिब सिंह के गैंग के लिए काम करता था। त्रिभुवन से मिलने के बाद बृजेश सिंह मन बना चुका था कि अब वो क्राइम की दुनिया में ही अपने कदम बढ़ाएगा और इसलिए साहिब सिंह के गैंग से जुड़ गया। बृजेश सिंह बेशुमार ताकत और बेहिसाब पैसा कमाना चाहता था। पूर्वांचल में उस वक्त दो गैंग थे जिनकी बीच अक्सर गैंगवार होता था। पहला साहिब सिंह का. और दूसरा मकनू सिंह का। मुख्तार अंसारी इसी मकनू सिंह गैंग के लिए काम करता था जुर्म की दुनिया में अपना कद बड़ा करने में लगा बृजेश सिंह जबरन सरकारी ठेके हासिल करने लगा यही काम मुख्तार अंसारी भी मकनू सिंह के लिए करता था। बस यहीं से उसकी और मुख्तार अंसारी की दुश्मनी शुरू हो गई और और अंसारी साहब को अपना दबदबा कायम करना था इसलिए जुर्म की दुनिया मे अपना कदम रखा

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