शनिवार, 14 जनवरी 2023

यूरिया और बिजली की समस्या को लेकर भारतीय किसान संघ का अनिश्चितकालीन धरना जारी

रायसेन। कस्बा देवनगर में पिछले चार रोज से किसानों के हक अधिकारियों बिजली यूरिया खाद की समस्या को लेकर अनिश्चित कालीन धरना किया जा रहा है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले मजबूर होकर किसानों को इस 6 डिग्री सेल्सियस तापमान पर धरना प्रदर्शन के लिए मजबूर किया जा रहा है।


क्योंकि 10 रोज पहले ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अवगत करा दिया गया था। इसके उपरांत भी ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए 12 घंटे में से 3 फेस लाइट बमुश्किल 5 से 7 घंटे ही मिल पा रही है। वह भी बहुत कम वोल्टेज के साथ एवं मप्र मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी द्वारा 3 माह के अस्थाई कनेक्शन काटे जा रहे हैं। भारतीय किसान संघ की मांग है कि किसान की मांग रूप 1 माह 2 माह के अस्थाई विद्युत पंप कनेक्शन दिया जाए। साथ ही यूरिया खाद की कालाबाजारी जारी है एवं सोसाइटियों के माध्यम से नगर में यूरिया खाद का वितरण नहीं किया जा रहा है। इन तमाम मांगों को लेकर दर्जनों किसान धरना दे रहे हैं जिसमें भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री मिट्ठू लाल मीणा, जिला सदस्य चरण सिंह धाकड़, तहसील गैरतगंज अध्यक्ष मोर सिंह कुशवाह, तहसील मंत्री विजय सिंह दांगी, पवन कुशवाह, वेद प्रकाश मीणा, रूपेश धाकड़, प्रताप कुशवाहा, बालाराम ठाकुर,नंदकिशोर मीणा, वीरसिंह दांगी, सूरत सिंह धाकड़, तेजराम धाकड़, कमलेश दांगी, पृथ्वी सिंह दांगी, लीलाधर साहू, हरगोविंद चौबे, गोरेलाल धाकड़, देवीसिंह धाकड़, तुलसीराम पटेल,मलखान सिंह धाकड़, दिलीप सिंह मीणा, ज्ञानचंद कैलाश दुबे,मेघराज दांगी आदि किसान प्रमुख रूप से धरना स्थल पर उपस्थित रहे।

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रविवार, 15 मई 2022

राजस्थान (Rajsthan) की महिला किसान संतोष पचार खेती कर कमाती है सालाना 25 से 30 लाख रुपए!




आज देश में कोई ऐसा क्षेत्र अछूता नहीं रहा जहां महिलाओं की भागीदारी न हो। इतना ही नहीं कृषि क्षेत्र में जहां हमेशा ये माना जाता रहा कि खेतीबाड़ी या बागवानी का काम अधिक मेहनत का होता है जिसे पुरुष ही कर सकते हैं लेकिन कुछ महिला किसानों ने अपने बूते पर कृषि क्षेत्र में सफलता हासिल करके इस मिथक को तोड़ दिया है।राजस्थान की महिला किसान संतोष पचार खेती किसानी कर कमाती है सालाना 25 से 30 लाख रुपए।हालांकि पहले भी महिलाएं घर के कामों के अलावा खेतीबाड़ी के कामों में भी पुरुषों का हाथ बंटाती रहीं हैं। लेकिन पूर्ण रूप से अपने दम पर खेतीबाड़ी का काम करने वाली महिलाओं की संख्या देश में पुरुषों के मुकाबले बहुत कम है। आज हम एक ऐसी महिला की सफलता की कहानी बता रहे हैं जिसने कृषि क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान बनाई। इतना ही नहीं कृषि क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए अच्छे कार्य के लिए इन्हें दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सबसे पहले जानते है ये महिला कौन है, क्या नाम है, कहा कि रहने वाली है और कैसे उन्होंने अपना शून्य से शिखर तक का सफर  तय किया। ये महिला किसान राजस्थान राज्य से है। इनका नाम संतोष पचार है, जो सीकर जिले के झिगर बड़ी गांव में रहती है। संतोष के पास स्वयं की 30 बीघा खेती की जमीन है। संतोष ने अपनी मेहनत के दम पर राज्य में अपनी एक अलग पहचान बनाई और इन्हें दो बार क्रमश: 2013 और 2017 में राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। हालांकि संतोष ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है। वे आठवीं कक्षा तक पढ़ी है। कम पढ़ी लिखी होने के बावजूद उन्होंने कृषि क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार संतोष पचार बताती है कि उन्होंने अपने खेत में लगभग 2002 में उन्नत जैविक खेती को करना शुरू किया था। शुरुआत में संतोष पचार ने अपने खेत में गाजर की खेती की थी जिसका उत्पादन लंबे, पतले और टेढ़े हुआ था। अपनी फसल को ऐसा देख संतोष पचार को एहसास हुआ कि उनके द्वारा बाजार से लिए गए बीज खराब क्वालिटी के है। उन्होंने अपनी फसल के उत्पादन को अच्छा बनाने के लिए खुद बीजों को तैयार करना शुरू किए। संतोष की बीज तैयार करने की तकनीक दूसरों से हटकर थी। आखिरकार संतोष पचार की यह मेहनत रंग लाई और परिणामस्वरूप संतोष पचार को फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ। संतोष पचार के इस तरीके ने गाजर की मिठास को करीब 5 प्रतिशत और उत्पादन क्षमता को भी करीब 2 से 3 गुना तक बढ़ा दिया। नई तकनीक से बीजोउत्पादन पर संतोष पचार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया। संतोष को 3 लाख रुपए का इनाम और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इसके बाद महिला किसान संतोष पचार यहां ही नहीं रूकी उन्होंने खेती के साथ ही बागवानी में भी हाथ आजमाया और यहां भी उन्हें सफलता मिली। दरअसल संतोष के पति को अनार का बाग लगाने का विचार मन में आया। जब ये विचार उन्होंने अपनी पत्नी संतोष पचार को बताया तो वे इसके लिए तुरंत तैयार हो गई। उन्होंने अपने खेत में अनार का बाग लगाया। तीन साल बाद अनार के पेड़ों से फल प्राप्त होने लगे। अनार की खेती से संतोष को काफी लाभ हुआ। अनार के बाद उन्होंने अपने खेत में नींबू और अमरूद के पौधे लगाए जिससे और भी उन्हें अच्छा फायदा हुआ। आज बागवानी करके संतोष सालाना करीब 25 से 30 लाख रुपए की कमाई कर रही हैं। 

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