गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

पीएम मोदी ने जारी किया किसान सम्मान निधि की 16वीं किस्त, आपको मिली या नहीं ऐसे चेक करें

पीएम किसान सम्मान निधि योजना इससे पहले अपनी 15 वी किस्त किसानों के खाते मे जमा की थी जिसको खुद प्रधानमंत्री ने जारी किया था लेकिन इस बार भी अपनी 16 वी किस्त भी जारी की है जिसको खुद प्रधानमंत्री ने जानकारी देकर बताया है 


इन तरीको से जान सकते है की खाते मे पैसे आए है या नहीं 

अगर आप लाभार्थी हैं, तो आप मैसेज के जरिए किस्त के पैसे चेक कर सकते हैं। दरअसल, आपको सरकार की तरफ से और बैंक की तरफ से भी मैसेज मिलता है जिसमें किस्त के 2 हजार रुपये के ट्रांसफर होने जानकारी दी होती है।

अगर किसी कारण आपके पास किस्त आने का मैसेज नहीं आया है, तो ऐसे में आप अपने नजदीकी एटीएम में जाकर मिनी स्टेटमेंट निकलवाकर चेक कर सकते हैं कि खाते में 16 वीं किस्त के पैसे आए हैं या नहीं 

आप अपने बैंक ब्रांच में जाकर पासबुक एंट्री करवाकर इस बारे में पता कर सकते हैं किस्त के पैसे खाते में ट्रांसफर हुए हैं या नहीं और अपने मोबाईल मे सभी मैसेज और बैंक से जानकारी के मैसेज को ध्यान से पड़ कर रखे और सारी जानकारी को ध्यान मे रखे 

योजना में जिन किसानों ने अपनी ई-केवाईसी, भूलेखों का सत्यापन और स्कीम में रजिस्ट्रेशन करते समय गलत जानकारी दी थी उनके खाते में 16वीं किस्त के पैसे नहीं आए हैं इसका कारण है गलत जानकारी के चलते इसलिए फॉम को सत्यापन करते सामय ध्यान रखने की जरूरत है 

जिन किसानों के खाते मे पैसे नहीं आए है वो हेल्पलाइन नम्बर पर जानकारी ले सकते है 

करोड़ों किसानों को खाते मे पैसे डालकर प्रधानमंत्री ने सभी किसानों को सौगात दी है ये धनराशि पा कर किसान बहुत खुश है 

पीएम नरेंद्र मोदी ने जारी की 16वीं किस्त। डीबीटी के माध्यम से करोड़ों किसानों के खाते में भेजे गए 21 हजार करोड़ रुपये

अगर किस्त नहीं आई है तो ऐसे चेक कर सकते है की किस्त आई है या नहीं 

1. पहले पीएम किसान योजना के आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर जाएं

2. इसके बाद आपको 'बेनिफिशियरी लिस्ट' वाले ऑप्शन पर क्लिक करना है

पूरी जानकारी लेने के बाद इसको सही से करना पड़ता है इसकी बाद किसनों को इसका बहुत फायदा मिलता है

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सोमवार, 23 मई 2022

उत्तर प्रदेश (UP) में गौ आधारित कृषि के लिए प्रशिक्षित किए जायेंगें किसान, प्राकृति खेती को मिलेगी बढ़ाबा



Cow Based Farming - यूपी में गौ आधारित कृषि को बढ़ाबा देने के मकसद से उत्तर प्रदेश की सरकार ने वहां के किसानों को प्रशिक्षण देने का एलान किया है, यह प्रशिक्षण 24 मई से 9 जून तक राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान द्वारा रहमन खेड़ा में दिया जाएगा। जो भी किसान यहाँ से प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगे , उन्हें उनके जिले में मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा जो अन्य किसानों को प्रशिक्षित करेंगें और सिखाएंगें ।
देश मे कृषि को सस्ता और टिकाऊ बनाने के लिए अब किसानों को भी नई तकनीक की जानकारी देना जरूरी हो गया है, जिससे उन्हें भी खेती से अधिक लाभ मिले, इसके लिए सरकार लगातार जैविक फार्मिंग और प्रकृतिक खेती पर ध्यान दे रही है। इस दोनों तरह की खेती में गौमूत्र और गोबर की आवश्यकता होती है जो हमारे किसान के पास आसानी से उपलब्ध हो जाएगी, यही कारण है कि किसानों को गौ आधारित कृषि को बढ़ाबा दिया जा रहा है व ट्रेनिंग दिया जा रहा है जिससे किसान को खेती में कम लागत लगे और अधिक मुनाफा हो ।इन सब फायदों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को गौ आधारित कृषि का प्रशिक्षण देने का एलान किया है।किसानों को यह ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश की कई जिलों में कृषि विभाग द्वारा लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी विंध्याचल, कानपुर, देवीपाटन, गोरखपुर बस्ती, प्रयागराज, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, झांसी, मुरादाबाद, मेरठ व बरेली में दिया जाएगा। गौ आधारित कृषि में गौमूत्र और गोबर का उपयोग किया जाता है , जो आसानी से उपलब्ध हो जाता है और इसमें बाहरी रासायनिक तत्व की जरूरत नही पड़ती है।गौ आधारित कृषि के कई फायदे हैं , जिसमे किसानो को कम लागत लगता है, संसाधन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और इसमें प्राकृतिक संसाधन का ज्यादा इस्तेमाल होगा साथ ही इससे हमारे पर्यावरण पर भी कम प्रभाव पड़ेगा और फसल को उचित पोषक तत्व प्राप्त होगा।इससे हम सब को अच्छे सब्जी मिलेगी जिसमे कम रासायनिक तत्व का उपयोग होगा और मनुष्य के शरीर पर कम प्रभाव पड़ेगा।

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मंगलवार, 17 मई 2022

IAS टॉपर शुभम कुमार भी बिहार में ही करेंगे काम, जानें कहां मिली ड्यूटी।

बिहार के शुभम कुमार ने यूपीएससी 2020 की सिविल सर्विस परीक्षा में टॉप करके अपने माता-पिता समेत प्रदेश का नाम रौशन किया था. अब शुभम अपने राज्य के ही लोगों की सेवा करेंगे. दरअसल केंद्र सरकार की ओर से शुभम को होम कैडर आवंटित किया गया है. शुभम के रुप में बिहार को एक बार फिर टॉपर नौकरशाह मिला है. इससे पहले बिहार के ही रहने वाले आमिर सुबहानी ने यूपीएससी परीक्षा में टॉप किया था और उन्हें होम कैडर मिला था. आमिर सुबहानी इस समय बिहार के चीफ सेक्रेटरी हैं

यूपीएससी टॉपर शुभम कुमार समेत बिहार को 10 नये आईएएस अधिकारी मिले हैं. जिसमें तीन बिहार के ही रहने वाले हैं. वहीं बिहार के 11 चयनित अधिकारियों को दूसरे राज्यों का कैडर मिला है. बिहार के रहने वाले तीन नये अधिकारियों टॉपर शुभम कुमार, प्रवीण कुमार (रैंक-7) और अनिल बसाक (रैंक-45) को बिहार कैडर मिला है. वहीं इसके अलावे निशा (हरियाणा), शैलजा पांडेय (उत्तराखंड), उत्तर प्रदेश से शिवकाशी दीक्षित, अपूर्व त्रिपाठी, सूर्यप्रताप सिंह और सारा अशरफ जबकि राजस्थान के आकाश चौधरी को बिहार कैडर मिला है.

बिहार के रहने वाले जिन 11 आईएएस को दूसरा कैडर मिला है. उसमें सत्यम गांधी को महाराष्ट्र कैडर, नितेश कुमार जैन को पंजाब कैडर, अर्चना कुमारी को मध्यप्रदेश कैडर, दलजीत कुमार को कर्नाटक कैडर, आशीष कुमार मिश्रा को उत्तराखंड कैडर, समीर किशन को केरल कैडर, उत्कर्ष कुमार और ओमप्रकाश गुप्ता को झारखंड कैडर, सुमित कुमार पांडेय को त्रिपुरा कैडर और रश्मि रानी को तमिलनाडु कैडर मिला है.बता दें कि केंद्र सरकार ने मंगलवार को बिहार समेत सभी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है. केंद्र सरकार ने इन नए आईएएस की सूची बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबाहानी को भेज दी है. केन्द्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार 177 आईएएस को अलग-अलग राज्य आवंटित हुए हैं. जिसमें बिहार के 14 आईएएस शामिल हैं. बतातें चलें कि इस समय बिहार के चीफ सेक्रेटरी आमिर सुबहानी ने भी यूपीएससी में टॉप किया था. वहीं शुभम कुमार ने यूपीएससी 2020 की सिविल सर्विस परीक्षा में टॉप करके अपने माता-पिता समेत प्रदेश का नाम रौशन किया था.





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रविवार, 15 मई 2022

राजस्थान (Rajsthan) की महिला किसान संतोष पचार खेती कर कमाती है सालाना 25 से 30 लाख रुपए!




आज देश में कोई ऐसा क्षेत्र अछूता नहीं रहा जहां महिलाओं की भागीदारी न हो। इतना ही नहीं कृषि क्षेत्र में जहां हमेशा ये माना जाता रहा कि खेतीबाड़ी या बागवानी का काम अधिक मेहनत का होता है जिसे पुरुष ही कर सकते हैं लेकिन कुछ महिला किसानों ने अपने बूते पर कृषि क्षेत्र में सफलता हासिल करके इस मिथक को तोड़ दिया है।राजस्थान की महिला किसान संतोष पचार खेती किसानी कर कमाती है सालाना 25 से 30 लाख रुपए।हालांकि पहले भी महिलाएं घर के कामों के अलावा खेतीबाड़ी के कामों में भी पुरुषों का हाथ बंटाती रहीं हैं। लेकिन पूर्ण रूप से अपने दम पर खेतीबाड़ी का काम करने वाली महिलाओं की संख्या देश में पुरुषों के मुकाबले बहुत कम है। आज हम एक ऐसी महिला की सफलता की कहानी बता रहे हैं जिसने कृषि क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान बनाई। इतना ही नहीं कृषि क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए अच्छे कार्य के लिए इन्हें दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सबसे पहले जानते है ये महिला कौन है, क्या नाम है, कहा कि रहने वाली है और कैसे उन्होंने अपना शून्य से शिखर तक का सफर  तय किया। ये महिला किसान राजस्थान राज्य से है। इनका नाम संतोष पचार है, जो सीकर जिले के झिगर बड़ी गांव में रहती है। संतोष के पास स्वयं की 30 बीघा खेती की जमीन है। संतोष ने अपनी मेहनत के दम पर राज्य में अपनी एक अलग पहचान बनाई और इन्हें दो बार क्रमश: 2013 और 2017 में राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। हालांकि संतोष ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है। वे आठवीं कक्षा तक पढ़ी है। कम पढ़ी लिखी होने के बावजूद उन्होंने कृषि क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार संतोष पचार बताती है कि उन्होंने अपने खेत में लगभग 2002 में उन्नत जैविक खेती को करना शुरू किया था। शुरुआत में संतोष पचार ने अपने खेत में गाजर की खेती की थी जिसका उत्पादन लंबे, पतले और टेढ़े हुआ था। अपनी फसल को ऐसा देख संतोष पचार को एहसास हुआ कि उनके द्वारा बाजार से लिए गए बीज खराब क्वालिटी के है। उन्होंने अपनी फसल के उत्पादन को अच्छा बनाने के लिए खुद बीजों को तैयार करना शुरू किए। संतोष की बीज तैयार करने की तकनीक दूसरों से हटकर थी। आखिरकार संतोष पचार की यह मेहनत रंग लाई और परिणामस्वरूप संतोष पचार को फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ। संतोष पचार के इस तरीके ने गाजर की मिठास को करीब 5 प्रतिशत और उत्पादन क्षमता को भी करीब 2 से 3 गुना तक बढ़ा दिया। नई तकनीक से बीजोउत्पादन पर संतोष पचार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया। संतोष को 3 लाख रुपए का इनाम और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इसके बाद महिला किसान संतोष पचार यहां ही नहीं रूकी उन्होंने खेती के साथ ही बागवानी में भी हाथ आजमाया और यहां भी उन्हें सफलता मिली। दरअसल संतोष के पति को अनार का बाग लगाने का विचार मन में आया। जब ये विचार उन्होंने अपनी पत्नी संतोष पचार को बताया तो वे इसके लिए तुरंत तैयार हो गई। उन्होंने अपने खेत में अनार का बाग लगाया। तीन साल बाद अनार के पेड़ों से फल प्राप्त होने लगे। अनार की खेती से संतोष को काफी लाभ हुआ। अनार के बाद उन्होंने अपने खेत में नींबू और अमरूद के पौधे लगाए जिससे और भी उन्हें अच्छा फायदा हुआ। आज बागवानी करके संतोष सालाना करीब 25 से 30 लाख रुपए की कमाई कर रही हैं। 

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रविवार, 24 अप्रैल 2022

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि-खरीफ अभियान -2022 पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

New Delhi/ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने NASC कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में खरीफ अभियान 2022-23 के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य पूर्ववर्ती फसल मौसमों के दौरान फसल के प्रदर्शन की समीक्षा और मूल्यांकन करना और राज्य सरकारों के परामर्श से खरीफ मौसम के लिए फसल-वार लक्ष्य निर्धारित करना एवं विभिन्न उत्पादन समग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करना और और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने की दृष्टि से नवीन तकनीकों को अपनाने की सुविधा प्रदान करना है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संतोष व्यक्त किया कि दूसरे अग्रिम अनुमान 2021-2022 के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 3,160 लाख टन होने का अनुमान है जो एक सर्वकालिक रिकॉर्ड होगा। दलहन और तिलहन का उत्पादन क्रमश: 269.5 और 371.5 लाख टन होगा।तीसरे उन्नत अनुमान के अनुसार, 2020-2021 के दौरान बागवानी उत्पादन 3310.5 लाख टन है जो भारतीय बागवानी के लिए अब तक का सबसे अधिक है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसानों के लिए लागत कम करने के लिए कीटनाशकों और बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने आग्रह किया कि यूरिया को नैनो-यूरिया से बदलने की रणनीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता कृषि-पारिस्थितिकी आधारित फसल योजना है, जो चावल और गेहूं जैसी अतिरिक्त वस्तुओं से तिलहन और दालों जैसी कम वस्तुओं और उच्च मूल्य वाली निर्यात कमाई वाली फसलों के लिए है। सरकार तिलहन और दलहन में आत्मनिर्भरता और पाम ऑयल को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करते हुए फसल विविधीकरण को उच्च प्राथमिकता दे रही है। देश में फसल विविधीकरण कार्यक्रम के लिए एक राष्ट्रीय नीति रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए प्रमुख राज्यों, शोधकर्ताओं, उद्योगों और नीति निर्माताओं जैसे सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया गया है। कृषि को टिकाऊ, लाभदायक और घाटे वाली वस्तुओं में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी राज्यों को फसल विविधीकरण की दिशा में काम करना चाहिए सम्मेलन ने वर्ष 2022-2023 के लिए कुल खाद्यान्न उत्पादन का राष्ट्रीय लक्ष्य 3280 लाख टन निर्धारित किया, जबकि चालू वर्ष के दौरान 3160 लाख टन उत्पादन का अनुमान था। 2022-2023 में दलहन और दलहन के उत्पादन का लक्ष्य 295.5 और 413.4 लाख टन निर्धारित किया गया है। न्यूट्री-अनाज का उत्पादन 2021-2022 में 115.3 से बढ़ाकर 2022-2023 में 205.0 लाख टन करना है। रणनीति अंतर-फसल और फसल विविधीकरण और उच्च उपज वाले विभिन्न प्रकार के बीज की शुरूआत के माध्यम से उत्पादकता वृद्धि और कम उपज वाले क्षेत्रों में उपयुक्त कृषि पद्धतियों को अपनाने के माध्यम से क्षेत्र में वृद्धि करने की होगी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि देश में 2015-2016 से खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले 6 वर्षों में कुल खाद्यान्न उत्पादन 251.54 से बढ़कर 316.01 मिलियन टन हो गया है। तिलहन ने भी इसी प्रवृत्ति का अनुसरण किया है और 2015-2016 में 25.25 मिलियन टन से 42% की वृद्धि दिखाई है और 2021-2022 में 37.15 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। भारत के कृषि उत्पादों का निर्यात 2021-2022 के दौरान 19.92% बढ़कर 376575 करोड़ रुपये हो गया है। गेहूं, अन्य अनाज, चावल , कच्चा कपास, ताजी सब्जी और संसाधित जैसी वस्तुएं। सब्जियों आदि में सर्वाधिक सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, "हमें ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि और बागवानी क्षेत्रों के उत्पादन और उत्पादकता में तेजी लानी होगी। सरकार ने कई विकास कार्यक्रमों, योजनाओं, सुधारों और नीतियों को अपनाया है जो किसानों के लिए उच्च आय पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सभी तिलहनों के लिए 3 साल की कार्य योजना आवंटन के साथ 381.95 करोड़ रुपये के आवंटन से अगले 3 वर्षों में कुल 14.7 लाख क्विंटल नए उच्च उपज वाले विभिन्न प्रकार के बीज के गुणवत्ता वाले बीज का उत्पादन किया जाएगा। कृषि आयुक्त डॉ. ए.के. सिंह ने खरीफ सीजन में फसल प्रबंधन की रणनीतियों पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए कहा कि सरकार के समय पर हस्तक्षेप के कारण देश ने अब तक का सबसे अधिक खाद्यान्न, तिलहन और बागवानी उत्पादन दर्ज किया है। अब तिलहन, दलहन और पोषक-अनाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मानसून के बाद, सामान्य से अधिक वर्षा हुई है और गर्मियों के दौरान लगभग 55.76 लाख हेक्टेयर में खेती की जा रही थी। सरकार की नीति के बाद, दलहन और तिलहन की खेती में इसी वृद्धि के साथ चावल के तहत क्षेत्र में कमी आई है। सरकार ने बीज और उर्वरक की आवश्यकता पर काम किया है और उनकी समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। सचिव ने आगामी सीजन के लिए उर्वरक आपूर्ति की स्थिति पर विचार-विमर्श किया। 2023 में पोषक-अनाज के उत्पादन में वृद्धि और मिलों पर अंतर्राष्ट्रीय वर्ष मनाने के लिए की गई नई पहलों के लिए विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। आरकेवीवाई के तहत कैफेटेरिया दृष्टिकोण और कृषि मशीनीकरण के लिए उप-योजनाओं को राज्यों के लाभ के लिए साझा किया गया। डिजिटल कृषि, पीएम-किसान और प्राकृतिक खेती पर भी प्रस्तुतियां दी गईं।

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