सोमवार, 8 मई 2023

मनीष कश्यप की मुश्किलें बढ़ीं,सुप्रीम कोर्ट ने लगाया फटकार राहत से इनकार।

बिहार/पटना बिहारियों के साथ कथित हिंसा को लेकर फेक वीडियो वायरल करने के मामले में बिहार के चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप को तमिलनाडु पुलिस बिहार से ट्रांजिट रिमांड पर ले गई थी, मनीष कश्यप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.आज सोमवार (8 मई) को सुप्रीम कोर्ट में मनीष कश्यप की याचिका पर सुनवाई होनी थी.सुप्रीम कोर्ट ने मनीष कश्यप की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया


सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने मनीष कश्यप की बेल और एनएसए को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. बेंच ने कहा कि मनीष कश्यप हाईकोर्ट जा सकते हैं. वहीं, सभी केस को एक जगह क्लब करने की याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है.


याचिका में की गई थीं तीन मांगें


मनीष कश्यप के खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में दर्ज सारे केस को क्लब कर दिया जाए.

मनीष को रेगुलर बेल मिल जाए.

तमिलनाडु सरकार की ओर से लगाए गए एनएसए को हटा दिया जाए.

17 मई तक हिरासत में है मनीष कश्यप


बता दें कि मनीष कश्यप ने पश्चिम चंपारण जिले के जगदीशपुर ओपी में सरेंडर किया था. इसके बाद आर्थिक अपराध की टीम ने पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया था. फिर तमिलनाडु की पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर ले गई. चार मई को मदुरै कोर्ट की ओर से सुनवाई के बाद मनीष कश्यप की न्यायिक हिरासत 17 मई तक के लिए बढ़ा दी थी. इसके बाद मनीष कश्यप को मदुरै सेंट्रल जेल में रखा गया है.


28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. कोर्ट ने इस मामले में तमिलनाडु सरकार से पूछा था कि एनएसए क्यों लगाया गया है? इसके लिए तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट से जवाब देने के लिए समय मांगा था. आज तमिलनाडु सरकार की ओर से काउंटर एफिडेविट फाइल किया गया था.

लेबल: , , , , , , ,

शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

सुप्रीम कोर्ट ने शुरू किया ऑनलाइन RTI पोर्टल , सूचना प्राप्त करना हुआ आसान

संवाददाता मोहित पटेल

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन RTI पोर्टल की शुरुआत कर दी है। यानी अब सूचना अधिकार कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से जानकारी पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं ऑनलाइन ऐप्लिकेशन डालने के लिए आपको  पोर्टल पर जाना होगा।  registry.sci.gov.in/rti_app

चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने पिछले हफ्ते ही एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट का ऑनलाइन RTI पोर्टल शुरू हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट भी सूचना अधिकार कानून, 2005 के तहत एक पब्लिक ऑफिस है, जिसके कामकाज से जुड़ी सूचना नागरिक मांग सकते हैं. 13 नवंबर 2019 को दिए एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को भी ‘पब्लिक ऑफिस’ करार दे चुका है।

लेबल: , ,