शनिवार, 21 जनवरी 2023

मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने में तन मन से जुटे मूर्तिकार!

समस्तीपुर जिले के सभी प्रखंडों में सरस्वती पूजा धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन सभी कोचिंग संस्थान,सरकारी व निजी स्कूलों में मां सरस्वती की प्रतिमा रखकर पूजा-पाठ किया जाता है। इसके लिए पूजा समितियों, विद्यालयों व कोचिंग संस्थानों ने अपने-अपने स्तर से तैयारी शुरू कर दी है।


बसंत पंचमी अवसर पर जिले विभिन्न स्थानों पर मूर्तिकार आगामी 26 जनवरी को जिले में सरस्वती पूजनोत्सव को लेकर मूर्तिकारों ने मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने में जुट गए हैं। प्रतिमा को निर्धारित तिथि तक पूर्ण करने के लिए मूर्तिकार पूरी तन मन से काम कर रहे हैं।


नए साल के शुरू होते ही मूर्तियों की बुकिंग शुरू हो जाती है। इसके लिए लोग अपने लिए प्रतिमाओं की अग्रिम बुकिंग कर लेते हैं।ताकि मूर्तिकार उनके हिसाब से मूर्तियों को अंतिम रूप दे सकें,संवाददाता ब्रजेश कुमार से बातचीत के दौरान न्यू सुपर मूर्ति आर्ट के मूर्तिकार उमेश पंडित (विनोद) ने बताया कि वो साल भर बसंत पंचमी का इंतजार करते हैं,क्योंकि बसंत पंचमी में वे  हजारों प्रतिमा बनाते हैं,जिससे उनका जीवन यापन होता  हैं,बसंत पंचमी के अलावा वो बाकी समय सीमेंट की मूर्तियां भी बनाते हैं, वे बताते हैं कि वसंत पंचमी के दौरान बनने वाली प्रतिमा के लिए वे दो महीने पहले से लग जाते हैं, वे बताते हैं मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी जिले से 30- 40 किलोमीटर दूर से लाते हैं, वे दो फीट से आठ फीट की मूर्तियां बनाते हैं,जिसकी कीमत पांच सौ से लेकर दस हजार रुपए तक हैं!


पीढ़ियों से बनाते आ रहे हैं मूर्तियां : शहर के हसनपुर जितवारपुर में पिछले कई वर्षों से मूर्तियां बनाई जा रही हैं।यह उनका पुश्तैनी काम है।

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शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022

नारायण दास महाराज का तिरोभाव महोत्सव मनाया

गोवर्धन। भक्ति वेदांत स्वामी नारायण दास महाराज का तिरोभाव महोत्सव धार्मिक कार्यक्रमों के बीच मनाया गया। सन्त नारायण महाराज ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक भक्ति का प्रचार किया। आज उनके हजारों शिष्य अनुयायी हैं।


जालन्धर पंजाब से आई गीता शर्मा ने बताया कि सभी भक्तों ने मिलकर गुरुजी का तिरोभाव महोत्सव मनाया है। गुरु वन्दना के बाद गिरिराज महाराज का अभिषेक किया। गुरु जी के संस्मरण को याद किया। माधव महाराज, नृसिंह महाराज, तीर्थ महाराज के निर्देश ने कार्यक्रम आयोजित किये गए। इस अवसर पर केशव गोस्वामी महाराज, नारायण गोस्वामी महाराज, वेदांत भवन गोस्वामी महाराज, विक्रम महाराज, तीर्थ गोसाई महाराज, माधव गोस्वामी महाराज, नरसिंह महाराज, गीता शर्मा, वन्दना शर्मा आदि मौजूद रहे ।




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सर्वप्रथम मां सीता ने की थी सूर्य की षष्ठी-पूजा जहां मुंगेर की गंगा नदी के बीच बना है सीता-चरण मंदिर

मिथिला में त्रेता युगों में राजा जनक के महल के विशाल प्रांगण में शिव-धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा ऋषि परशुराम के क्रोध पर विनम्रता से विजय प्राप्त कर दशरथ-पुत्र श्रीराम जब स्वयंवर के बाद अनुज लक्ष्मण और नव विवाहिता सीता के साथ जल-मार्ग से अयोध्या लौट रहे थे तो कार्तिक शुक्ल एकादशी को मुंगेर (प्रारंभिक नाम मुद्गलपुरी जो मुद्गल ऋषि के नाम पर पड़ा। बाद में मोदगिरी पर्वत-श्रृंखला के कारण, फिर मोंघीर ब्रिटिश शासकों ने किया। आज अंतिम परिवर्तन के बाद ' मुंगेर ' प्रमंडल के नाम से विश्व-विख्यात है।


पहले दिन संध्या के समय अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को प्रसाद भरे सूप अर्पित कर व्रती नारी ( कई पुरुष भी) भक्त एवं परिजनों के जल ढारने के बाद दूसरे दिन उदीयमान सूर्य की उपासना कर नई ऊर्जा से संबलित होने के विश्वास के साथ अगले दिन गोपाष्टमी को गऊ-सेवा करेंगे।

  गंगा नदी के मध्य में उभरे बालू के टापू पर नौका रुकी। सीता मां के साथ राम और लक्ष्मण ने भी पावन जल में डुबकी लगायी। फिर सूप में प्रसाद अर्पित कर दूसरे दिन चार दिवसीय अनुष्ठान को पूरा कर अयोध्या की ओर भ्राता द्वार के साथ नौका पर प्रस्थान कर गयीं। रामायण के अनुसार जब राम के वनवास- काल में असली सीता को सुरक्षा की दृष्टि से गंगा नदी से पांच किलोमीटर पूर्व में अग्नि देव के संरक्षण में देख दिया गया और मायावी सीता को साथ ले दोनों भाई असुरों से आक्रांत वन की ओर बढ़ गये। महापंडित और अजेय पराक्रमी रावण को मिले वरदान के अनुसार मानव अवतार में श्रीराम को उसे मुक्ति तो देनी थी। साथ ही विशाल भारत के अधिकांश क्षेत्रों में दैत्य तथा आततायियों से त्रस्त सज्जन और ईश्वरभक्त दुर्बल देशवासियों की रक्षा भी करनी थी। आतंकी दैत्यों और बाली जैसे कुपथगामी शासकों, जिसने छोटे भाई सुग्रीव को भागने के लिए विवश कर उसकी पत्नी को भी अपने अधीन कर लिया था, को भी यमलोक पहुंचाने का प्राण-दण्ड देना भी अभीष्ट था।







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राधाकुंड के ब्रजानंद घेरा स्थित सभागार में अधिवास संकीर्तन में शामिल गद्दीनशीन महंत केेशव दास महाराज, संत बाल योगेश्वर दास महाराज बद्री धाम व अन्य

गोवर्धन। गिरिराज महाराज की तलहटी में ब्रज के गौड़ीय संत अनंत दास बाबा जी महाराज के तीन दिवसीय तिरोभाव महोत्सव का शुभारंभ अधिवास संकीर्तन के साथ हुआ।


कस्बा राधाकुंड के ब्रजानंद घेरा में महोत्सव के शुभारंभ पर अनंत दास बाबा जी महाराज के चित्रपट पर रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के गद्दीनशीन महंत केशव दास महाराज ने माल्यार्पण किया। नियम सेवा में रूक रहे देशी-विदेशी हजारों भक्तों को उनके संस्मरण व ईश्वर की भक्ति के प्रवचन व्यास विश्वनाथ पंडित जी महाराज ने किये। गोवर्धन व राधाकुंड की भजन मंडली के संत हरिमोहन दास, गोपाल दास, नव गौरांग दास, नरहरिदास, काजल कृष्ण दास, नंदगोपाल दास आदि द्वारा ढप-ढोलक, मृदंग व हारमोनियम की धुन पर अधिवास संकीर्तन का आयोजन किया गया। इस अवसर महंत केशव दास महाराज ने बताया कि गुरू अनंत दास बाबा जी महाराज ने जीवन पर्यन्त राधाकुंड में रहकर भजन साधना की। उनके ईश्वर लीला में प्राप्ति के बाद हजारों देशी-विदेशी भक्त तिरोभाव महोत्सव में शामिल होते हैं। आज 29 अक्टूबर शनिवार को प्रातः 11 बजे से हजारों भक्तों की मौजूदगी में डोले के राधाकुंड-श्यामकुंड की परिक्रमा लगाई जाएगी। इस अवसर पर संत बाल योगेश्वर दास, सुबलदास सरदार, बलराम दास, व्यास परीक्षित दास, सुलोचन दास, अमल दास, लोकनाथ, तमालकृष्ण, छैलबिहारी दास आदि थे।

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