रविवार, 23 अक्टूबर 2022

Diwali 2022: चांदी के नाम पर जर्मन सिल्वर तो नहीं खरीद रहे आप, बाजार में नकली सिक्कों की भरमार

Diwali 2022 दिवाली के उत्सव पर बाजार में खरीदारों की भीड़ को देखते हुए कुछ दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के लिए मिलावटी चांदी बेचते हैं। ऐसे में आप हमारी इस आर्टिकल में दी गईं ट्रिक्स को अपनाकर आसानी से असली और नकली सिक्कों में अंतर पता कर सकते हैं।


दिवाली का मौका है और इस दौरान लोग घरों में पूजन के लिए सोना- चांदी खरीदना पसंद करते हैं। माना जाता है कि दिवाली के समय घर में सोना-चांदी लाने से समृद्धि बढ़ती है और माता लक्ष्मी जी की कृपा आप पर बनी रहती हैं। पिछले कुछ दशकों में सोने की कीमत में काफी उछाल आया है और यह आम आदमी के बजट से बाहर हो गया है। ऐसे में बहुत से लोग दिवाली के उत्सव को मनाने के लिए चांदी के सिक्के या फिर गणेश जी और लक्ष्मी जी की चांदी की सिक्के से ही पूजन करना पसंद करते हैं।


दिवाली के अवसर पर इस कारण चांदी की मांग बढ़ जाती है और कुछ दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में चांदी में मिलावट करना शुरू कर देते हैं। ऐसे में आपको इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि असली और नकली चांदी की कैसे पहचान करें, जिसके बारे में आज हम अपने इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं।

चांदी की शुद्धता के लिए फाइननेस (Fineness) मापदंड उपयोग किया जाता है। यह कुछ हद तक सोने कैरेट की तरह ही होता है। इसमें शुद्धता का मापदंड 999, 925, 900 से तय किया जाता है। यह नंबर जितना अधिक होगा, चांदी भी उतनी ही शुद्ध होगी। यह पूरे राष्ट्रीय स्तर पर मान्य है और इसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा तय किया गया है।


जर्मन सिल्वर मिलाकर बेचे जाते हैं सिक्के

दिवाली के अवसर पर बाजार में मांग को देखते हुए कई दुकानदार जर्मन सिल्वर और गिलट मिलाकर सिक्के बेचते हैं। यह मिलावट दो तरीके से की जाती है- पहला चांदी के सिक्कों में 30 से 40 प्रतिशत गिलट या फिर जर्मन सिल्वर मिलाकर बेचा जाता है और दूसरा 99 प्रतिशत गिलट या फिर जर्मन सिल्वर के सिक्के बेचे जाते हैं, जिस पर चांदी की पॉलिश की जाती है।


चांदी की शुद्धता कैसे करें पहचान

मैग्नेट टेस्ट

चांदी की सबसे बड़ी खास बात होती है कि धातु होने के बाद भी इसमें कोई भी चुंबकीय गुण नहीं होता है। अगर दुकानदार द्वारा बेची जाने वाली चांदी मैग्नेट से चिपक कर रही है तो समझ लीजिए कि उसमें किसी तरह की मिलावट की गई है और वह असली चांदी नहीं है।


बर्फ से करें टेस्ट

चांदी पर बर्फ अन्य धातुओं के अपेक्षा काफी तेजी से निकलती है। इसके जरिए भी आसानी से आप असली और नकली चांदी में फर्क कर सकते हैं ।


चांदी को घिसकर

चांदी को घिसकर या फिर रगड़कर टेस्ट करना काफी एक अच्छा परीक्षण माना जाता है। चांदी को घिसने पर अगर एक सफेद लाइन बन रही है, तो वह असली है। अगर उसमें किसी और रंग की लाइन बनती है, तो मान लीजिए वह मिलावटी है।


नाइट्रिक एसिड टेस्ट

सोने और चांदी की शुद्धता पहचानने के लिए नाइट्रिक एसिड टेस्ट सबसे अच्छा माना जाता है। इसका प्रयोग विक्रेताओं की ओर से भी किया जाता है। यह लगभग हर सोना-चांदी विक्रेता की दुकान पर उपलब्ध होता है। अगर आप कोई सोने-चांदी से बनी वस्तु खरीद रहे हैं और उस पर नाइट्रिक एसिड डालने पर हरा या नीली रंग हो जाए तो वह मिलावटी है। अगर उसका सफेद या हल्का कला नजर आए तो वो चांदी असली मानी जाती है।


ऐसे तय करें चांदी की कीमत

चांदी की कीमत को शुद्धता के आधार पर तय किया जाता है। इसके लिए आप (चांदी की कीमत * चांदी का वजन * चांदी की शुद्धता = चांदी की कीमत) ये फॉर्मूला उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि सोना-चांदी खरीदते समय हमेशा विक्रेता से जीएसटी नंबर वाला बिल लें, जिस पर चांदी की प्योरिटी और वजन के बारे में स्पष्ट रुप से लिखा हो, जिससे कोई भी समस्या आने पर आपको मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ें।







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शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

Dhanteras 2022: आज धनतेरस, दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 तक खरीदारी का शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व होता है। धनतेरस के दिन खरीदारी करना शुभ माना गया है। इस बार 22 अक्टूबर शनिवार और 23 अक्‍टूबर रविवार दोनों दिन धनतेरस की खरीदारी की जा रही है। 22 को द्वादशी तिथि दोपहर बाद 435 तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि लगेगी।


हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व होता है। धनतेरस के दिन खरीदारी करना शुभ माना गया है। इस बार 22 अक्टूबर, शनिवार और 23 अक्‍टूबर, रविवार, दोनों दिन धनतेरस की खरीदारी की जा रही है। 22 को द्वादशी तिथि दोपहर बाद 4:35 तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि लगेगी, जो रविवार 23 अक्टूबर को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। त्रयोदशी की रात्रि में यमदेव को दीपदान भी किया जाएगा।

वहीं धन्वंतरी व कामेश्वरी जयंती रविवार को मनाई जाएगी। मुहूर्त के अनुसार, धनतेरस के लिए सामान की खरीदारी शनिवार को दोपहर 1:30 बजे से अगले दिन शाम करीब पांच बजे तक की जा सकती है। ज्‍योतिषियों के अनुसार, इस बार धनतेरस पर त्रिपुष्कर नामक शुभ योग बनने से हर तरह का निवेश और खरीदारी की जा सकती है।


गोल्फ ग्राउंड स्थित खडे़श्वरी मंदिर के पुजारी राकेश पांडेय के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। यह भगवान धन्‍वंतरी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस बार धनतेरस प्रदोष व्रत व हनुमान जयंती का संयोग भी एक साथ पड़ रहा है। ऐसा संयोग 27 वर्षों के बाद हो रहा है।


धनतेरस और दीपावली में बाजार में होनेवाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक की नई व्यवस्था लागू की है। शनिवार दोपहर एक बजे से रविवार को भीड़ समाप्त होने तक शहर के सभी बाजार में बड़े-छोटे वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। दो और चार पहिया वाहन भी बाजार में नहीं घुस पाएंगे। खरीदारी के लिए केवल पैदल ही जाने की अनुमति दी गई है। इसके लिए सभी मार्केट के आगे बैरिकेड लगाया जा रहा है।


यहां लगाया जा रहा बैरिकेड


हीरापुर के लिए: हटिया मोड़, पानी टंकी, पंचमुखी मंदिर, विवेकानंद चौक, हरिमंदिर के पास बैरिकेड किया जाएगा।


हीरापुर के लिए पार्किंग स्थल: पार्क मार्केट ग्राउंड, झारखंड मैदान, हटिया मोड़ से गोल्फग्राउंड जानेवाले रास्ते के दोनों तरफ, अभय सुंदरी स्कूल परिसर।


पुराना बाजार के लिए बैरिकेडिंग: झरिया पुल के पास, गुप्ता मेडिकल के पास, हावड़ा मोटर, टेंपल रोड बालिका विद्यालय, शंभु धर्मशाला मोड़, टिकियापाड़ा मोड़, रतनजी रोड, रेलवे सिनेमा रोड आदि जगहों पर बैरिकेड रहेगा।


पुराना बाजार के लिए पार्किंग स्थल: रेलवे एप्रोच रोड के किनारे।


बरटांड़ मार्केट के लिए पार्किंग स्थल: नियोजनालय भवन मैदान।


स्टील गेट के लिए पार्किंग स्थल: कोयला भवन जाने वाली सड़क पर दोनों तरफ।


मिट्टी का घरौंदा बना आकर्षण का केंद्र, जमकर हो रही खरीदारी


भारतीय संस्कृति में दीपों के प्रकाश का विशेष महत्व है। जब बात रोशनी के पर्व दीपावली की हो रही हो तो दीये का महत्व और भी बढ़ जाता है। दीपावली पर रंगोली और घरौंदा बनाने की परंपरा सदियों से पुरानी है। मान्यता है कि यह सुख और समृद्धि का प्रतीक है। दीपावली को लेकर कई बच्चे खुद से घरौंदा का निर्माण करते हैं, तो कुछ बच्चे खरीदते हैं। हीरापुर स्थित पुलिस लाइन में मिट्टी के घरौंदा, गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, आकर्षक दीये व मिट्टी के घंटी आदि की जमकर बिक्री हो रही है। यहां करीब 10 दुकानें हैं।घरौंदा बेचने वाला विशाल पंडित ने बताया कि पहले मिट्टी आसानी से मिल जाती थी, इसलिए घरौंदा की कीमत कम थी, लेकिन अब चारों ओर मकान बन जाने के कारण मिट्टी खरीदना पड़ता है। इससे घरौंदा के कीमत में वृद्धि हुई है। बताया गया कि इन दिनों हर रोज 50 से 60 घरौंदा की बिक्री हो रही है। एक घरौंदे की कीमत दो सौ से चार सौ रुपये तक है।






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दीवाली और छठ पूजा पर्व पर बिहार जाने वाली सभी ट्रेनों की सीटें फुल, रेलवे चलाएगा 108 ट्रेनें

दीवाली और छठ पर्व पर बिहार जाने वाली सभी ट्रेनों की सीटें फुल हो चुकी है। कई ट्रेनों में रिजर्वेशन नहीं हो रहे तो कई में लंबी वेटिंग है। ऐसे में यात्रियों की सुविधा के रेलवे 180 ट्रेनें चलाएगा। अगले दो महीनों के लिए भी सीटें नहीं हो रही कन्फर्म।


नेशन संवाद, बिहार पटना: त्योहार सीजन में इस बार सभी ट्रेनों की सीट हो गई है। इससे अब दिवाली व छठ पूजा पर बिहार जानी वाली सभी ट्रेनों की सीट फुल हो गई है। जिसके कारण ट्रेनों में बिहार जैसे राज्यों में जाने वालों के लिए सीटें कंफर्म नहीं हो रही हैं। रेलवे विभाग के पीआरओ नीरज शर्मा ने बताया कि पूरे नादर्न रेलवे के लिए करीब 780 ट्रेनें चलाई जा रही हैं। जिससे दिल्ली अंबाला रूट पर इनमें से करीब 180 ट्रेनें हैं। जो जल्द चलने वाली है।

दीपावली के साथ ही अब एक और बड़ा त्योहार आने वाले है वो है छठ पूजा। अगर आप भी छठ पूजा के लिए कहीं जाने का प्लान कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ने त्योहारी सीजन के चलते यात्रियों की भीड़ को देखते हुए स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा कर दी है। इससे छठ पूजा के मौके पर स्टेशनों पर उमडऩे वाली भीड़ को कंट्रोल किया जा सकेगा।

स्पेशल ट्रेन के माध्यम से ट्रेनों की संख्या में बढऩे से इन ट्रेनों में रेल यात्रियों को आसानी से कंफर्म टिकट भी मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। अगर आप भी कंफर्म सीट पाना चाहते है तो इसके लिए आइआरसीटीसी की अधिकारिक वेबसाइट से आनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं।

ये है वह राज्य, जहां स्पेशल ट्रेनें चलनी

हर बार दिवाली और छठ पूजा के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और हरियाणा राज्यों से बिहार जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुए रेलवे ने यह फैसला लिया है। इन रुट पर रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेनों के चलाने से लोगों को बड़ी सहूलियत होगी। अभी कुछ ट्रेनें चल भी चुकी है।






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