Bihar News : आज से 'जन विश्वास यात्रा' पर तेजस्वी यादव... पढे पूरा शेड्यूल
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सत्यमेव जयते
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देश के सभी 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अगले सत्र से 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों को लागू कर दिया जाएगा। सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ अधिकांश राज्यस्तरीय और प्राइवेट विश्वविद्यालय भी 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों को लागू करेंगे।अब तीन नहीं... चार साल में होगा ग्रेजुएशन, बीए-बीएससी- बीकॉम वाले नए नियमों पर ध्यान दें!
बीए-बीएससी-बीकॉम करने वाले जिन लोगों को अब तक 3 साल में ही ग्रेजुएशन की डिग्री मिल जाती थी, उनके लिए बड़ी खबर है। अब उनकी ग्रेजुएशन की डिग्री तीन साल में नहीं बल्कि 4 साल में मिलगी। दरअसल, फोर ईयर अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम (FYUP) की रूपरेखा बनकर तैयार है। आने वाले शैक्षणिक सत्र 2023-24 से सभी विश्वविद्यालयों के नए छात्र 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों (बीए, बीकॉम, बीएससी) आदि में दाखिला ले सकेंगे। यूजीसी ने 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के लिए सभी आवश्यक नियम और दिशानिर्देश तैयार किए हैं। यूजीसी के मुताबिक अगले सप्ताह, 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के यह नियम देश के सभी विश्वविद्यालयों के साथ साझा किए जाएंगे। देश के सभी विश्वविद्यालयों में लागू होगा फैसला देश के सभी 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अगले सत्र से 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों को लागू कर दिया जाएगा। सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ अधिकांश राज्यस्तरीय और प्राइवेट विश्वविद्यालय भी 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों को लागू करेंगे। इसके अलावा देश भर की कई 'डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी' भी इस 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट कार्यक्रम को लागू करने के लिए अपनी सहमति प्रदान करने जा रही हैं। 2023-24 से जहां सभी नए छात्रों के पास चार साल वाले अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों का विकल्प होगा, वहीं पुराने छात्रों के लिए भी 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम की स्कीम को मंजूरी दी जा सकती है। इसका सीधा सीधा अर्थ यह है कि ऐसे छात्र जिन्होंने इस वर्ष सामान्य तीन वर्षीय अंडर ग्रेजुएशन पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है, उन्हे भी अगले सत्र से चार साल की डिग्री कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिल सकता है।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मुताबिक सभी छात्रों के लिए 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम मुहैया कराया जाएगा, लेकिन इस पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के लिए छात्रों को बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि छात्र चाहें तो वह पहले से चले आ रहे 3 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों को ही जारी रख सकते हैं। यूजीसी चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार के मुताबिक 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों की पूरी स्कीम को जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। उनके मुताबिक विश्वविद्यालयों में पहले से ही दाखिला ले चुके छात्रों को भी 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। ऐसे छात्र जो प्रथम या सेकंड ईयर में हैं यदि वह चाहेंगे तो उन्हें भी 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों का विकल्प उपलब्ध कराया जा सकेगा। हालांकि इसकी शुरूआत अगले वर्ष यानी 2023-24 से शुरू होने वाले नए सत्र से ही होगी। लास्ट ईयर के छात्रों को भी मिलेगा मौका यूजीसी 4 वर्षीय पाठ्यक्रमों के मामले में विभिन्न विश्वविद्यालयों को भी कुछ नियम कायदे बनाने की छूट देगा। विश्वविद्यालयों की एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल में इसको लेकर आवश्यक नियम तय किए जा सकते हैं। विश्वविद्यालय चाहे तो फाइनल ईयर में पढ़ने वाले छात्रों को भी 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनने का अवसर दे सकते हैं। यूजीसी चेयरमैन ने इन अहम बदलाव के कारणों के बारे में बताते हुए कहा कि अगर वर्षीय अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम में केवल नए छात्रों को ही मौका मिलेगा तो इसके नतीजे चार साल उपरांत पता लग सकेंगे। वहीं पुराने छात्रों के इस स्कीम से जुड़ने से यह नतीजे जल्दी सामने आ सकेंगे।
4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के उपरांत दो साल का पोस्ट ग्रेजुएशन और एमफिल करने वालें छात्रों के लिए पीएचडी में दाखिले के लिए 55 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। हालांकि, एमफिल कार्यक्रम को अब बहुत लंबे समय तक जारी नहीं रखा जाएगा। कई बड़े विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में एमफिल का कोर्स ऑफर नहीं करेगे। ऐसा नई शिक्षा नीति के तहत किए गए बदलावों के कारण किया जा रहा है। जहां एक और यूजीसी इस नए बदलाव को लेकर पूरी तरह से तैयार है, वहीं कई शिक्षकों एवं शिक्षक संगठनों ने इस पर अपनी आपत्ति भी दर्ज की है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों से छात्रों के ऊपर 1 वर्ष का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
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समस्तीपुर शहर के चकनूर में दिल्ली पब्लिक स्कूल का शुभारंभ किया गया l मुख्य अतिथि सह स्थानीय विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने इसका विधिवत उद्घाटन किया l उद्घाटन सत्र के दौरान छात्र, विद्यालय प्रबंधन एवं गणमान्य अतिथियों को संबोधित करते हुए विधायक शाहीन ने कहा कि अपना जिला अब शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी आगे बढ़ चुका है l कई अच्छे और मान्यता प्राप्त स्कूल व कोचिंग खुल गये हैं जो जिले के विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान कर रहे हैंl इन्होंने स्कूल संचालक से गरीब छात्र-छात्राओं के लिये स्कूल फी में विशेष छूट देने की अपील की ताकि आर्थिक तंगी के कारण गरीब छात्रों का भविष्य कुंठित न हो सके l कहा कि डी.पी.एस का शुभारंभ स्थानीय छात्रों के उज्जवल व बेहतर भविष्य के लिए किया गया है l मौके पर पूर्व जिला पार्षद संजीव कुमार राय, जिला राजद प्रवक्ता राकेश कुमार ठाकुर , राजद नेता जयलाल राय, रंजीत कुमार रम्भू , डी.पी.एस के डायरेक्टर मोo फैयाज, प्राचार्य संतोष कुमार यादव , व्यवस्थापक वीरचन्द्र यादव तथा मुकेश कुमार सहित दर्जनों शिक्षक तथा सैकड़ो विद्यार्थी मौजूद थे l
जहां आज की युवा पीढ़ी ग्लैमरस की चकाचौंध रौशनी में डूबा हुआ हैं, सोशल मीडिया की आभासी ज्ञान ने उन्हें जकड़ रखा हैं। ऐसे में समाज और परिवार से वह दूर होता जा रहा हैं।इसी समाज के कुछ लोग देश और समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसे में ही एक युवा हैं आनंद मीना, जो स्वामी विवेकानंद के उस कथन को चरितार्थ करते हैं। जिसमें उन्होंने कहा था मैं उस भगवान की सेवा करता हूं, जिसे अज्ञानी लोग मनुष्य कहते हैं!आनंद अपने द्वारा चलाए जा रहे क्लब प्रयास के माध्यम से सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं, इस ठंड में वो उन असहाय, बेसहारों का सहारा बन रहे हैं जो इस ठंड में गर्म कपड़े के बिना स्टेशन पर ठंड से कपकपा रहे हैं, उनके लिए ये सितकालीन कपड़े इकट्ठे करते हैं और फिर वह कपड़े लेकर शहर के असहाय लोगों के बीच जाकर देते हैं।02 से 10 जनवरी के बीच अभियान चलाया, RPCAU परिसर के भीतर सभी शीतकालीन कपड़े फैकेल्टी रेजिडेंसी से कॉल और पिकअप के आधार पर प्राप्त कर लिए एकत्रित कपड़ों की छटाई और रेसिंग के बाद सेमरी गांव पूसा और समस्तीपुर जंक्शन पर असहाय लोगों के बीच वितरण किए। इनके टीम के सदस्य हैं, विनय परिमार, अंकित शर्मा, मधुसूदन रेड्डी आदि।
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